India’s Biggest

Rural Media Platform

वापस आएगी मूंगफली की खेती 

जनपद में मूंगफली का काफी बड़ा क्षेत्रफल हुआ करता था और वहां सारी सुविधाएं भी उपलब्ध थीं, जिससे यह खेती फलफूल रही थी पर समय के साथ-साथ मूंगफली यहां से खत्म होती गयी।

मखाने की खेती कर तराई इलाकों के किसान बढ़ा सकते हैं अपनी आमदनी

अभी तक मखाने का उत्पादन में बिहार का नाम आता है, लेकिन अब उसी मखाने की खेती सीतापुर जिले में भी हो रही है। तराई के किसान इसके जरिए आसानी से आमदनी बढ़ा सकते हैं।

देखा है आपने एेसा पोर्टेबल कोल्हू, ऐसे निकाला जाता है गन्ने का ताज़ा-ताज़ा रस

सीतापुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर पश्चिम-दक्षिण में पिसावां ब्लॉक का अल्लीपुर गाँव है । यहाँ की महिलाएं इस छोटे से कोल्हू से हर सुबह ताजा गन्ना निकालकर पीती हैं, 225 घरों वाले इस पूरे गाँव में 8-10 मशीने हैं इसकी कीमत 1400 रुपये है।

यहां नारी अदालत में सुलझाए जाते हैं बलात्कार, बाल विवाह जैसे मामले 

“आंगन में रखी बर्तनों की डलिया चारपाई के नीचे उठाकर नहीं रखी तो मेरे पति में बहुत बुरी तरह से मुझे लात-घूंसे मारे और मेरे ऊपर मिट्टी का तेल डाल दिया। माचिस नहीं मिल पाई नहीं तो मुझे जला देते, मैं जैसे-तैसे वहां से भाग पाई।” ये कहना है नारी अदालत में शिकायत लेकर आई गंगापुर गाँव की रहने वाली गीता गौतम (25 वर्ष) का। गीता गौतम 25 किलोमीटर दूर गंगापुर गाँव से अपनी तीन साल की बेटी के साथ इस नारी अदालत में आई थी।

विधानसभा चुनावों में बाढ़ विस्थापित नहीं बने मुद्दा

घाघरा नदी की कटान में हमारा घर-बार सब डूब गया। सरकार ने हमें दूसरी जगह बसाया, लेकिन यहां कोई इंतजाम नहीं किया है। हम अंधेरे में रहते हैं। सड़कें नहीं हैं। कोई बीमार हो जाए तो आसपास अस्पताल नहीं है।

सीतापुर के बहादुरगंज के सैकड़ों लोग नहीं डाल पाए वोट

कई जगहों पर मतदाता लिस्ट में नाम न होने के चलते वोट नहीं डाल पाए, तो कई जगह जिंदा को मृतक भी दिखाया गया। रामपुरमथुरा के बहादुरगंज में कई लोग अपना वोट नहीं डाल पाए।

चूल्हा चौका बाद में, पहले पूरा हुआ मतदान का संकल्प

उत्तर प्रदेश सूबे के तीसरे चरण का मतदान 19 फरवरी को सम्पन्न हुआ। इस मतदान रूपी महापर्व में महिला मतदाताओं ने पहले मतदान किया, फिर घर के बाकी काम किए।

जनता तय करे गुंडाराज चाहिए या कानून का राज: मायावती

BSP मुखिया मायावती आज सीतापुर में एक रैली को संबोधित कर रहीं थी, अपने संबोधन में मायावती ने कहा कि अब जनता को तय करना है कि क्या वह गुंडागर्दी वाली पार्टी को वोट देगी या फिर कानून राज के लिए बीएसपी को वोट देगी।

नोटबंदी: अपना पैसा ही हो रहा पराया

शहर में भले ही कैश की किल्लत ख़त्म हो गयी है। सब कुछ सामान्य हो गया, लेकिन फोटो देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के हालात अभी भी बहुत खराब हैं।

तीस वर्षों से छात्रों को निःशुल्क पढ़ा रहे हैं बाल गोबिन्द रस्तोगी

यह कोई सरकार शिक्षक नहीं हैं। न ही इन्हें गरीब बच्चों को पढ़ाने का पैसा मिलता है। फिर भी रोज सुबह उठकर लालपुर गाँव के बाल गोबिन्द रस्तोगी (80 वर्ष) गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं।