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सोनभद्र

इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा नहीं मिलती, ठेले पर ले जाई जाती हैं प्रसूताएं

सोनभद्र के दुद्धी ब्लॉक में एम्बुलेंस के तत्काल न मिलने के कारण प्रसूताओं को ठेले या बैलगाड़ी पर लेकर जाने को मजबूर आशा बहुएं।

खेती की एक तकनीक जो है बाढ़ और सूखे के खिलाफ एक सुरक्षाकवच

सोनभद्र में आदिवासियों को अपनी खेती पर मौसम के उतार-चढ़ाव पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे आज भी सदियों से चली आ रही बेवर खेती प्रणाली से खेती करते हैं।

सोनभद्रः बेमौसम बारिश से किसान परेशान, फसलों और जानवरों के लिए नुकसानदायक

सोनभद्र जिले में बीते दो दिनों से क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश किसानों के लिए मुश्किल बन रही है।

आदिवासियों की एकजुटता का प्रतीक है कर्मा नृत्य, आप भी बस देखते रह जाएंगे

कर्मा नृत्य गोंड आदिवासियों का पारंपरिक नृत्य है। यह नृत्य जनजाति की खुशी का इजहार करने का तरीका है जो ज्यादातर छत्तीसगढ़ और सोनभद्र में प्रचलित है।

#स्वयंफ़ेस्टिवल: सुदूर बसे सोनभद्र के करीब 35 हजार जनता ने स्वयं फ़ेस्टिवल का हिस्सा बन कर जाना अपना हक 

स्वयं फ़ेस्टिवल के छठे दिन (7 दिसम्बर) भी वो ही सब कार्यक्रम थे जो पिछले छह दिन से सभी जगह चल रहे थे पर स्थान बदल हुआ था, आज की टारगेट ग्रामीण जनता अलग थी। आज की नई जगह थी सोनभद्र के राबर्ट्सगंज ब्लाक के बिचपई गाँव के गामीण।

#स्वयंफ़ेस्टिवल: कोटेदार ब्लैक में नहीं बेच पाएंगे राशन, यह जान ग्रामीणों के चेहरे दमके

सोनभद्र में अब कोटेदार राशन की चोरी नहीं कर पाएगा, जिलाधिकारी सोनभद्र की यह लाइनें सुनकर चौपाल में खुसर पुसर होने लगी। ग्रामीणों के चेहरे खुशी से चमका रहे थे, एकदूसरे से पूछ रहे थे ‘कइसे भाई इ चौरी बंद होगी।’

#स्वयंफ़ेस्टिवल: योजनाएं बताने दुम्हान गाँव में जुटा पूरा प्रशासन

सोनभद्र के दुद्धी ब्लाक के दुम्हान गाँव में मेले के चौथे दिन ब्लाक स्तर का पूरा प्रशासन ग्रामीणों को उनके हित के लिए चलाई जा रही सरकार की योजनाओं से परिचित कराने के लिए जुटा हुआ था।

विदेश पहुंच रही सोनभद्र की मिर्च

उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले सोनभद्र जिले को आदिवासी बहुल्य क्षेत्र होने के कारण पिछड़ा माना जाता है, लेकिन लोगों की ये मानसिकता बदलनी शुरू हो गई है।

दो वर्ष में कनहर सिंचाई परियोजना का हुआ मात्र 50 फीसदी निर्माण

कनहर सिंचाई परियोजना के निर्माण से सोनभद्र के दुद्धी व चोपन ब्लॉक के 108 ग्रामों के असिंचित भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य है।

#स्वयंफ़ेस्टिवल:: सोनभद्र के आदिवासी अब भूखे नहीं सोएंगे, बकरी बदलेगी उनका जीवन 

सोनभद्र के आदिवासी कल तक दूसरों के मवेशी चराते थे और उससे कुछ चरवाई पाते जाते थे, जो उनके रोजाना के खाने पीने में कुछ मदद करता था। पर आज जब इलाके के सात आदिवासियों को उनकी आजीविका के लिए एक-एक बकरी दी गई तो उन्हें लगा कि कोई उनके बारे में भी सोचता है।