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फाइनल मुहर के बाद बसपा के महावत मैदान में लगाने लगे दौड़ 

उन्नाव। बसपा ने जिले की सभी छह विधानसभाओं में पूर्व में घोषित प्रभारियों के नाम पर ही प्रत्याशिता की अंतिम मुहर ठोंक दी है। इस बार पार्टी ने तीसरी बार भी राधेलाल पर भरोसा जताया है। राधेलाल मौजूदा विधायक हैं।

तब टिकट न मिलने पर नेता ने खा लिया था ज़हर

वहीं, बसपा सुप्रीमो ने दो रनर प्रत्याशियों पर भी भरोसा जताया है। इसी के साथ बसपा ने इस बार एक कम उम्र के प्रभारी को भी हाथी पर बैठा राजनीतिक समर में भेज दिया। हाथी के महावतों ने भी फाइनल मुहर लगने के बाद गाँवों में दौड़ और तेज कर दी है। साल 2012 के विधानसभा चुनावों में एक सीट को छोड़ बाकी जगह बसपा का प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा था। अकेले मोहान विधानसभा में उसके प्रत्याशी राधेलाल रावत विजय पताका फहराने में सफल हुए थे। बता दें कि टिकट कट जाने पर मौजूदा विधायक रावत ने जहर निगल लिया था। इसके बाद दहशत में आई पार्टी ने उन्हें पुन: हाथी का महावत बना दिया था। इसके बाद बसपा ने जीत अर्जित की थी।

रनर उम्मीदवारों पर बसपा ने दिखाया भरोसा

वहीं, तीन विधानसभाओं में बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। इनमें से दो सीट पर पार्टी ने रनर पर भरोसा जताया है। सफीपुर में रामबरन कुरील तो बांगरमऊ में इरशाद खान पिछले चुनाव में दूसरे पायदान पर रहे थे। पार्टी ने इन पर चुनावी फतह के लिए दोबारा भरोसा जताया है। उधर, तीसरी पुरवा विधानसभा में रनर रहे नरेंद्र लोधी के बजाय अनिल सिंह को हाथी निशान सौंपा गया है।

दिवंगत एमएलसी अजीत सिंह के बेटे सनी सबसे कम उम्र के उम्मीदवार

हाथी की चाल सबसे ज्यादा सुस्त सदर विधानसभा में रही है। पिछले दो चुनावों में यहां बसपा को ज्यादा समर्थन नहीं मिला है। वर्ष 2012 में बसपा के कद्दावर ब्रजेश पाठक की पत्नी नम्रता पाठक तो साल 2014 में हुए उपचुनाव में पूर्व मंत्री अशोक सिंह बेबी को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा था। यहां इस बार सुरेश पाल को टिकट थमाया गया है। सर्वाधिक चर्चा में रही भगवंतनगर विधानसभा सीट से दिवंगत एमएलसी अजीत सिंह के पुत्र शशांक शेखर सिंह सनी को हाथी का महावत चुना गया है। सनी सबसे कम उम्र के उम्मीदवार हैं। पिछले कई महीनों से वे लगातार मतदाताओं से संपर्क कर पिता द्वारा तैयार की गई कीमती राजनीतिक विरासत को फिर से पाने के प्रयास में जुटे हैं।