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उन्नाव: पोलिंग बूथों बिजली कनेक्शन पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती

उन्नाव। विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे प्रशासनिक अमले ने मतदेय स्थलों की व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कराने की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। इसके तहत पोलिंग बूथों पर शौचालय, बिजली, पानी, रैम्प व फर्नीचर आदि की व्यवस्था दुरुस्त की जा रही है।

सप्ताह भर में बिजली लगाने के दिए निर्देश

सभी कार्यों की समीक्षा मुख्य विकास अधिकारी संजीव कुमार ने शिक्षा विभाग, ब्लॉक से सम्बन्धित अधिकारियों, विद्युत और जल निगम के अधिकारियों के साथ की। इसमें बिजली न होने की वाले मतदेय स्थलों की संख्या अधिक पाई गई। इस पर उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को एक सप्ताह में सभी मतदेय स्थलों का विद्युतीकरण का काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कुछ मतदेय स्थलों पर शौचालय का काम भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है जिसे तीन दिन में पूरा करने के निर्देश दिये गये है।

शौचालय का काम भी अभी तक पूरा नहीं हुआ

जिले में कुल 1303 मतदेय स्थल हैं। बीते दिनों कराए गए सर्वें में यह बात सामने आई थी कि मतदेय स्थलों में 434 विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति ठीक नहीं है। इन्हें दुरुस्त कराने के निर्देश भी जारी किए गए थे। वहीं, 395 स्कूलों के शौचालयों का काम पूरा हो गया है जबकि 39 में कार्य चल रहा है। सीडीओ ने संबंधित ब्लॉकों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तीन दिन में काम पूरा करा कर प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाए।

हैंडपंपों की मरम्मत का काम भी लगभग पूरा

पोलिंग बूथों पर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए खराब पड़े हैंडपंपों को भी दुरुस्त कराया जा रहा है। 140 बूथों पर हैंडपंप खराब थे। इनमें 13 नए भी लगवाए गए हैं। खराब हैंडपंपों की मरम्मत का काम भी लगभग पूरा हो गया है। 20 से 25 हैंडपंप बचे हैं। इन्हें एक-दो दिन में दुरुस्त करा लिया जाएगा। सीडीओ ने बताया कि फर्नीचर की उपलब्धता सभी पोलिंग बूथों पर पर्याप्त है।

बिजली कनेक्शन देना बड़ी समस्या

समीक्षा में सबसे खराब स्थिति मतदेय स्थलों में बिजली की पायी गयी। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने अधिशाषी अभियंता को जमकर फटकार लगाई। साथ ही, उन्होंने शिक्षा विभाग के विकास खण्ड स्तरीय अधिकारियों को जिन विद्यालयों में बिजली का कनेक्शन नहीं है उनकी सूची तलब की है। उनसे यह भी सूचना मांगी गई है कि विद्यालय से एलटी लाइन की दूरी कितनी है। मिली जानकारी के मुताबिक, जिले के मतदेय स्थलों के विद्युतीकरण के लिए 66 लाख रुपए की धनराशि मिली थी। औसतन एक विद्यालय में छह हजार रुपए का खर्च कनेक्शन वायरिंग आदि में आ रहा है। मगर कई विद्यालयों की एलटी लाइन से दूरी अधिक होने के कारण बिजली विभाग के नियम उनमें कनेक्शन के लिए रोड़ा बन रहे हैं। नियमत: जहां चालीस मीटर की दूरी है तो वहां केबिल से कनेक्शन दिया जा सकता है। यदि दूरी इससे अधिक है तो उसके लिए नए पोल लगवा कर लाइन खिंचवानी पड़ेगी। लिहाजा, शिक्षा विभाग से यह ब्यौरा मांगा गया है कि विद्यालय से एलटी लाइन की दूरी कितनी है।

ऐसे मतदेय स्थल जहां बिजली नहीं है उनकी सूची मांगी गई है। चुनाव से पहले ऐसे पोलिंग बूथों पर वैकल्पिक प्रबंध के तहत सौर उर्जा का भी सहारा लिया जाएगा।
संजीव कुमार, सीडीओ, उन्नाव।