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#SwayamFestival बाराबंकी में सैकड़ों किसानों ने सीखे विदेशी फूलों की खेती के गुर

अरुण मिश्रा- कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

विशुनपुर (बाराबंकी)। “अगर किसानों को अपनी गरीबी को मिटाकर बेहतर जीवन जीना है तो उन्हें परंपरागत खेती से छोड़कर आधुनिक तरीके से खेती करनी होगी। धान-गेहूं के साथ किसान फूल और सब्जियां भी उगानी होंगी।” य़े बातें प्रगतिशील किसान और फूल उत्पादक मोइनुद्दीन ने कहीं। गांव कनेक्शन फाउंडेशन के स्वयं फेस्टिवल में सैकड़ों किसांनों ने जरवेरा और ग्लेडियोलस जैसे फूलों की खेती के गुर भी सीखे।

बाराबंकी मुख्यालय से 23 किमी दूर देवा ब्लाक के दफेदरपुरवा स्थित प्रगतिशील किसान मोईनुद्दीन के फार्म हाउस पर आयोजित चौपाल और बागवानी शिविर में प्रगतिशील किसान मोईनुद्दीन ने कहा, “किसानों को औद्यानिक खेती के तहत विदेशी फूलों की खेती अच्छा मुनाफा दे सकती है। हमने लगभग 10 साल पहले एक बीघे में फूलों की खेती शुरु की थी। आज पूरे दफेदारपुरवा और आसपास के कई गांवों किसान ग्लेडोलियस की खेती करने लगे हैं।” उन्होंने विदेशी फूलो की खेती करने के तरीकों को भी किसानो से साझा किया। फूलों की खेती के दम पर दिल्ली तक नाम कमा चुके मुइनुद्दीन ने सैकड़ों किसानों को पॉली हाउस का निरीक्षण भी कराया।

किसानों को विदेशी फूलों की खेती के फायदे बताते मोइनुद्दीन।

इस दौरान कृषि विभाग की तरफ से दफेदारपुरवा के किसानों को मुफ्त में मिट्टी की जांच की गई और उन्हें मृदा कार्ड दिए गए। गोष्ठी को संबोधित करते हुए सहायक विकास अधिकारी कृषि अशोक मिश्रा ने कि किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच सरकार मुफ्त में करवा रही है। किसानों को चाहिए कि मिट्टी में जिन पोषक तत्वों की कमी हो उसे निर्धारित मात्रा में डालें, ताकि मिटटी की उर्वरता बनी रहे।” उन्होंने गांव कनेक्शन का शुक्रिया अदा किया और कहा की गांव कनेक्शन की पहल बहुत बढ़िया है ऐसे कार्यकर्मो से किसानो को काफी लाभ होता है।

इस दौरान सहायक जिला उद्यान निरीक्षक अनिल श्रीवास्तव ने किसानों को बागवानी से सम्बंधित जानकारी प्रदान। उन्होंने कहा कि किसान बागवानी की खेती करके अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को जनवरी व फरवरी महीने में मुफ्त में पौधे उपलब्ध कराये जाते हैं इसका किसानों को फायदा लेना चाहिए। इस अवसर पर कृषि विभाग व उद्यान विभाग के अधिकारियों सहित सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित रहे।

स्वयं फेस्टिवल के दौरान मिट्टी की मुफ्त और तुरंत जांच के बाद मृदा कार्ड मिलने से किसानों के चेहरे खिल गए। फोटो- अरुण

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