India’s Biggest

Rural Media Platform

events

#स्वयंफेस्टिवल : बालनिकुंज स्कूल के पास अब शोहदो की खैर नहीं, पुलिस लेगी खबर

स्वयं डेस्क

कम्यूनिटी जर्नलिस्टः स्वाती शुक्ला

लखनऊ। बालनिकुंज इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल ने और छात्राओं ने बताया कि कॉलेज के आने के टाइम पर सुबह नौ बजे और छुट्टी के टामइ पर चार बजे लड़के स्कूल के बाहर खड़े रहते हैं। लड़कियों की समस्या को लखनऊ पुलिस क्राइम ब्रांच से आए लवकुश मिश्रा, एसआई अक्षय कुमार ने सुना और तत्काल थाना मड़ियांव में फोन कर के इन बच्चियों के स्कूल के पास पिकेट की स्थाई व्यवस्था करवा दी गई। आत्मरक्षा के गुर सीखने पहुंचे स्कूली छात्रों में आत्मविशवास देखने को मिला। मड़ियांव के बाल निकुंज विद्यालय में लगभग 200 छात्रों को रेड ब्रिगेड की ओर से कराटे और बॉक्सिंग प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही छात्राओं को महिला प्रकोष्ठ ने अपने विशेष सत्र में 1090 के लिए जागरुक किया।

पूरी गंभीरता के साथ छात्राएं इस सेशन की बनीं भागीदार।

स्वयं फेस्टीवल के सातवें दिन आयोजित कार्यक्रम में रेड ब्रिगेड की ऊषा ने स्कूल की छात्राओं से उनकी सुरक्षा को लेकर बातचीत की। महिलाओं और लड़कियों के अधिकार और आत्मसम्मान के लिए लड़ाई लड़ रही इस संस्था ने छात्राओं को समाज में हो रहे अपराधों से सचेत कराया। उन्होंने सुरक्षा के लिए लड़कियों से दूसरों पर निर्भर ना रहने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही उन्हें कराटे और बॉक्सिंग के विषय में जानकारी देकर प्रशिक्षत किया। उन्होंने छात्रों से अपने खिलाफ किए जा रहे शोषण और हो रहे अपराध के लिए आवाज बुलंद करने के लिे प्रोत्साहित किया।

सीखने का जज्बा यहां साफ नजर आया।

महिला प्रकोष्ठ ने भी स्वयं फेस्टिवल मंच के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर जोर देने की बात कही। विशेषज्ञों ने बताया कि समाज में महिलाऐं चुपचाप अपना शोषण कराती हैं और अपने सम्मान को बचाए रखने के लिए किसी के खिलाफ कोई आवाज उठाती हैं। ऐसी पीड़िताओं के लिए प्रदेश में 1090 की वीमेन पावर की सेवा का आगाज किया गया। इस सेवा के तहत सभी महिलाऐं और लड़कियां किसी भी तरह के अपने साथ हो रहे अपराध के बारे में सीधे पुलिस महकमे को बता सकती हैं। अपराधी के खिलाफ दर्ज कराई गई उनकी शिकायत उनकी पहचान के साथ गोपनीय रखी जाएगी। इसलिए लड़कियां बिना किसी डर और संकोच के अपनी समस्या बता सकती हैं जिसका निस्तारण संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).