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खेती किसानी

किसानों के लिए काम की खबर: इस तरह स्टोर करेंगे तो छह महीने तक नहीं सड़ेगा प्याज

सुधा पाल

लखनऊ। प्याज की कीमतें अक्सर खाने वालों के आंसू निकालता रहा तो कई बार कीमतें न मिलने पर किसान माटी मोल इसे बेचने के मजबूर होते हैं। जबकि यूपी समेत देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर प्याज की पैदावर होती है। प्याज की कीमतों के पीछे भंडारण एक ब़ड़ी वजह होती है। यूपी में एक ऐसा मॉडल तैयार किया गया है, जिसमें प्याज रखने पर 4 से 6 महीने तक प्याज नहीं सड़ेगा।

प्रदेश में प्याज की साल भर खपत होने के कारण इसकी मांग बराबर बनी रहती है। बढ़ती मांग के साथ इसकी आवक और उत्पादन को देखते हुए इसका उचित तरीके से भंडारण जरूरी है। प्याज के भंडारण के लिए प्रदेश के किसान एक ऐसे प्याज भंडारण गृह का उपयोग कर सकते हैं जिसे वे आसानी से स्वयं बना सकते हैं और इसके निर्माण के लिए सरकार उन्हें सब्सिडी भी देती है। इसके लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उप्र में एक मॉडल को प्रस्तुत किया है जो प्याज भंडारण के लिए आदर्श भंडारण गृह है। प्रदेश में हर साल लगभग 24 हजार हेक्टेयर के क्षेत्रफल में प्याज का उत्पादन किया जाता है। भंडार के लिए अक्सर किसान घरों में या अपने खेतों में ही भंडार गृह बना लेते हैं लेकिन उचित जानकारी के अभाव में उत्पाद सुरक्षित नहीं हो पाता है। इसलिए उन्हें काफी भारी मात्रा में नुकसान उठाना पड़ता है।

भंडारण ग़ृह लगभग 40,000 रुपए में तैयार होता है। लेकिन बाद में किसानों को सब्सिडी भी मिलती है। 
डॉ. एमपी यादव, संयुक्त निदेशक (उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उप्र)

किसान ज्यादातर घर के आंगन या कमरों में ही प्याज का भंडारण कर लेते हैं। ऐसा करने से उत्पाद को उचित तापमान नहीं मिलता, प्याज सड़ने लगती है और उनका अंकुरण होने लगता है। इसके साथ ही मौसम की मार के कारण भी किसानों को नुकसान होता है। किसानों को सही तरह के प्याज भंडारण गृह के निर्माण के लिए और उन्हें जागरूक करने के लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने एक मॉडल प्रस्तुत किया गया है।

प्याज भंडारण गृह एक आदर्श भंडारण गृह मॉडल

नया प्याज भंडारण गृह एक आदर्श भंडारण गृह

लखनऊ। विभाग की ओर से प्रस्तुत किया गया यह नया प्याज भंडारण गृह एक आदर्श भंडारण गृह है जिसकी वजह से उत्पाद सुरक्षित बना रहता है। इसकी खासियत यह है कि इसकी निचली सतह ईंट से बनी होती है। लगभग 1 मीटर की दीवार चारों तरफ से खड़ी की जाती है जिससे बारिश के मौसम में भी उत्पाद को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसके साथ ही जानवरों के घुसने की भी कोई गुंजाइश नहीं होती है। 1 मीटर की पक्की दीवार के बाहर पूरा ढांचा बांस का होता है। जाली नुमा होने के कारण इसमें पर्यात हवा आती रहती है जो वेंटीलेटर का काम करता है और एक उचित तापमान बना रहता है। इसमें विभिन्न रैक (अलमारियां) बनी रहती हैं जहां प्याजों को सतह दर सतह संरक्षित किया जाता है जिससे उनकी दूरी बनी रही और उनमें सड़न या रोग न लगे। प्याजों को समय-समय पर पलटने की आवश्यकता रहती है। इसके साथ ही उनकी छंटाई भी करनी होती है। तभी वे सही तरह से भंडारित रह सकेंगे।

यूपी में उद्यान और खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक डॉ. एसपी जोशी बताते हैं, “लगभग 25 टन तक इस नए भंडारण गृह में प्याज का भंडारण किया जा सकता है। इसके लिए सरकार की तरफ से मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवेलेप्मेंट ऑफ हार्टीकल्चर की योजना के तहत 25 टन की क्षमता वाले प्याज भंडारण गृह के निर्माण पर ही किसानों को 50 फीसदी अनुदान दिया जाएगा।”
योजना के तहत भंडारण गृह बनवाने पर सब्सिडी की धनराशि किसान के बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) दे दी जाती है। इसके तहत प्याज का 25 टन तक भंडारण किया जा सकता है और सरकार इसे बनाने के लिए किसानों को सब्सिडी भी देती है।