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महफ़िल

क़िस्सा मुख़्तसर : “गधे आम नहीं खाते”

क़िस्सा मुख़्तसर : मिर्ज़ा साहब की आम के लिए दीवानगी हद दर्जे की थी। आम उन्हें बहुत पसंद थी। एक बार ऐसा हुआ कि ग़ालिब अपने दोस्तों के साथ घर के पास वाली गली में बैठे आम खा रहे थे तभी ...

“मैंने फाउंटेनपेन उसके हाथ में रख दिया, उसे जैसे ज़माने की दौलत मिल गई”

छोटी सी कहानी : मैं बरामदे में बैठा था। बच्चे ने दरवाजे से झांका। मैंने मुस्कुराकर पुकारा। वह मेरी गोद में आकर बैठ गया।उसकी शरारतें शुरू हो गईं। कभी कलम पर हाथ बढ़ाया, कभी कागज पर। मैंने गोद से उतार दिया। वह मेज का पाया पकड़े खड़ा रहा। घर में न गया। दरवाजा खुला हुआ था। 

वीडियो, जिसमें शाहरुख भी हैं और अटल जी भी

जन्मदिन विशेष : अटल जी की सालगिरह पर उनके लिखी उन कविताओं को फिर से याद करते हैं जिन्हें एक अल्बम में भी सजाया गया था। इस अल्बम में अदाकारी थी एक्टर शाहरुख ख़ान ने ...