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संवाद

पीने के पानी का बाज़ारीकरण दु:खदायी

स्वस्थ जीवन और लंबी आयुष के लिए शुद्ध पेयजल को प्राणदायी और अतिमहत्वपूर्ण माना जाता रहा है किंतु पिछले दो दशकों में शुद्ध पेयजल या प्राकृतिक खनिजयुक्त जल के नाम पर जिस तरह का व्यवसायीकरण हुआ है, वो नितांत चिंतनीय है।

डंपर, व्यापमं की राह पर हवाला कांड

मध्यप्रदेश के कटनी जिले के हवाला कारोबार के खुलासे ने सियासत में भूचाल ला दिया है। यह ठीक वैसे ही सुर्खियां बन रहा है, जैसा कभी डंपर कांड, व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) कांड बने थे और कई बड़े लोगों पर इन मामलों की आंच आई थी लेकिन सजा उन लोगों को नहीं मिली जिन पर राजनीतिक हमले हुए, हवाला कांड तो शुरुआत में ही उस दिशा में बढ़ता नजर आने लगा है, जहां डंपर और व्यापमं पहुंचे।

गाँव वाले गर्मी, बरसात और शीतलहर से निहत्थे लड़ते हैं

हर साल गर्मी और उसके साथ उससे जुड़ी हुई बीमारियां आती हैं। शहरों के लोग यदि बिजली आती रहे तो बिजली के पंखे, कूलर और एसी का सहारा लेते हैं।

सिंचाई की नाकाम योजनाओं से सबक लेना जरूरी

अभी ग्वालियर-धौलपुर-भरतपुर इलाके में घूम रहा हूं। देश में पिछले दो साल मानसून की कमी वाले साल रहे हैं और इस साल की अच्छी बारिश ने रबी फसलों की बुवाई में जोरदार बढ़ोत्तरी दिखाई है।

रिपोर्टिंग की सनसनी में विवेक और विश्वसनीयता बनी रहे

टीवी चैनल पर एक समाचार दिखाया जा रहा था कि आलू किसान बेचता है 40 पैसा प्रति किलो और वही आलू बाजार में बिकता है 10 रुपया प्रति किलो। इसका जिम्मेदार बताया जा रहा था नोटबन्दी को। यह समाचार मेरे कान में पड़ा तब ध्यान से टीवी देखा तो सतहीपन समझ में आ गया।