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संवाद

किसानों की आय दोगुनी करने के लिए नई नीतियां बनानी ज़रूरी

इस समय जब पिछले कुछ सप्ताह से किसानों की आमदनी अगले पाँच वर्षों में दोगुनी करने वाली बहस भी दोगुनी रफ्तार से हो रही है, वहीं किसानों की लगातार हो रही आत्महत्या में कोई राहत नहीं है। किसान पांच साल धैर्य से इंतज़ार करने की बजाय अपनी जान ले रहे हैं।

नेताओं की भाषा के निचले स्तर की शायद सीमा नहीं है

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भारतीय जनता पार्टी को भारतीय जुमला पार्टी और उनकी ही पार्टी के नेता सतीश चन्द्र मिश्रा ने झूठ बोलो पार्टी कहा था यहां तक तो कठिनाई नहीं।

क्या करोड़पतियों के लिए राष्ट्र सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर है?

करोड़पतियों का कोई राष्ट्र नहीं होता है? तो क्या राष्ट्र सिर्फ उस भीड़ के लिए है जो ग़रीब है, नासमझ है और जो अपने तर्कों के प्रति कम, भावनाओं के प्रति ज़्यादा समर्पित होती है? ज़रूर इन सब बातों पर काफी कुछ सोचा और लिखा गया होगा क्योंकि राष्ट्रवाद के लंपट से लेकर शहादत तक के तमाम पहलुओं पर लिखा ही गया है।

जमीनी हकीक़त: किसानों की आय बढ़ानी है तो मंडियों को जोड़ना होगा 

चुनाव के दौरान कई बार किसानों का कर्ज़ा माफ करने का वादा नेताओं के भाषणों में आया है, लेकिन खेती की असली समस्याओँ पर ध्यान न दिए जाने पर सवाल उठ ऱहे हैं।

आर या पार: उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे राजनीति की दिशा तय करेंगे

आठ नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 86 फीसदी नोटों को बंद करने के फैसले के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा है इसलिए यहां के नतीजे आंशिक तौर पर ही सही लेकिन नोटबंदी पर जनादेश के तौर पर देखे जाएंगे।

ट्रंप की पाक नीति, कैसे देखे भारत?

ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस की कमान संभालने से पूर्व कम से कम भारत द्वारा यह उम्मीद की जा रही थी कि पाकिस्तान के प्रति उनका रवैया अपेक्षाकृत अनुदार रहेगा।

कॉमन सिविल कोड लागू करके संविधान का सम्मान करें

उच्चतम न्यायालय ने समान नागरिक संहिता लागू करने को अनेक बार कहा है लेकिन सेकुलर सरकारें सब के लिए एक जैसा कानून लागू करना ही नहीं चाहतीं।

न्याय अभी जि़ंदा है...

आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का मंगलवार को आया फैसला बेहद अहम है। खासकर भ्रष्टाचार के दलदल में गोते लगाने वाले नेताओं को जहां ये गले की फांस लग रहा होगा, वहीं कई को सांप सूंघ गया होगा लेकिन आमजनों के लिए देर से ही सही, न्याय के प्रति अगाध विश्वास जैसा है।

कभी अपने शहर की पुरानी बस्ती भी घूम आएं

हर छोटे और बड़े शहरों की असली ज़मीनी खूबसूरती वहां के पुराने बाजारों और गली मोहल्लों में होती है। पुरानी बस्तियों और बाजारों की चमक शहर के मल्टीप्लेक्स और मॉल वाले इलाकों से बिल्कुल परे होती है।