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सेहत कनेक्शन

बलरामपुर की नई ओपीडी का पुराना हाल

दरख्शां कदीर सिद्दीकी

लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में एक ही छत के नीचे सारे मरीजो को इलाज नही मिल पा रहा है। मरीजों को अभी भी इलाज के लिए इधर से उधर दौड़ना पड़ रहा है। शनिवार से बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी मरीजों के लिए खोल दी गयी थी। लेकिन मरीजो को नयी ओपीडी मे पूरी तरह से इलाज नही मिल रहा है।

डाक्टर ड्यूटी के समय गायब

बलरामपुर अस्पताल में की नयी ओपीडी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। नयी ओपीडी में अभी तक शिफ्टिंग नही हो पाई जिस वजह से खाली बाल रोग विभाग की ओपीडी मरीजों के लिए खोली गयी है। उसमें भी तीन ओपीडी में से सिर्फ एक ही डाक्टर मरीजों का इलाज करतें नजर आए। बाकी कमरे तो सबके खुले थे लेकिन डाक्टर अपने कमरों से नदारद मिले।

सिर्फ एक ही दवा वितरण काउन्टर पर मरीजों की लगी भीड़

मरीजों को दवा के लिए लाइन न लगानी पड़े इसके लिए न्यू ओपीडी के तीनों फ्लोर पर दो दो काउन्टर बनाए गए थे। सिर्फ एक काउन्टर पर ही मरीजों को दवाईयां दी जा रही है। जिस वजह से मरीजों को अब भी दवाईयां लेने के लिए घण्टों इंतजार करना पड़ रहा है। बाकी दूसरा काउन्टर खाली पड़ा है।

फर्नीचर न होने के कारण अभी ओपीडी का संचालन पुरी तरह से नही हो पा रहा है। बालरोग की ओपीडी शुरू कर दी गयी है। जल्द ही मरीजों के लिए पूरी ओपीडी का संचालन शुरू हो जाएगा। निकास द्वारा आपातकालीन द्वार है। जब हम देखेगे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है तो हम उस द्वार को खोल देंगे।
डॉ. राजीव लोचन, सीएमएस

एक ही द्वार से आपातकालीन और निकास द्वार दोनों का लिया जाएगा काम

46 करोड़ रुपये की लागत से बनी बलरामपुर अस्पताल की तीन मंजिला न्यू ओपीडी बिल्डिंग में अभी करीब एक महीने तक मरीजों को इलाज नहीं मिल सकेगा। मरीजों के लिए भले ही यह ओपीडी खोल दी गयी हो लेकिन बिल्डिंग में फायर एग्जिट समेत कई खामियां है। यहां ओपीडी शुरू होने से करीब 10000 मरीजों को लाभ मिलेगा। लेकिन यह अभी दूर की मुमकीन नही। निकास द्वारा का संचालन अभी भी नही शुरू किया गया एक ही द्वार से मरीजों के आने जाने काम चल रहा है। वही निकास द्वार को आपातकालीन द्वार बताकर उसको बन्द रखा जा रहा है।