India’s Biggest

Rural Media Platform

stories

जैविक तरीके से ऐसे तैयार करें गुलाब की नर्सरी

दीपांशु मिश्रा, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। किसान अब फसल ही नहीं बल्कि फूलों की नर्सरी के लिए भी जैविक ढंग अपना रहे हैं। किसानों के हिसाब से जैविक तरीके से नर्सरी में कम लागत और अधिक मुनाफा होता है।

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में रहने वाले मनोज कुमार (45 वर्ष) जैविक ढंग से गुलाब की नर्सरी तैयार करते हैं। मनोज बताते हैं, ‘वर्ष 2014 से मैं दो बीघे के बगीचे में पचास हज़ार गुलाब की खेती करता था। मैंने सोचा कि गुलाब की खेती के लिए पौधे नर्सरी से न खरीदने पड़े तो इसके लिए मैंने खुद जैविक ढंग से 30000 गुलाब के पौधों की नर्सरी तैयार की और इसे अपने बगीचे में लगाया।

जैविक ढंग से की गई इस नर्सरी से मेरे बगीचे में पहले से ज्यादा फूल दिखाई दिए तबसे मैं जैविक ढंग से ही गुलाब की नर्सरी तैयार करके खेती करने लगा।’

जैविक ढंग से कोई फसल तैयार करने से हमेशा फायदा होता है। इससे किसानों को कम लागत तो लगती ही है, साथ-साथ पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं होता है।
जयकरण सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, (बाराबंकी)

कैसे तैयार करते हैं गुलाब की नर्सरी

गुलाब की नर्सरी तैयार करने के लिए काली मिट्टी का प्रयोग करना चाहिए। काली मिट्टी में सबसे पहले जीवामृत मिलते हैं। इसमें 10 से 15 प्रतिशत रेत मिलाकर एक पन्नी में भरकर उसमें कलम लगाई जाती है। इसके बाद इसके ऊपर ग्रीन नेट लगा दिया जाता है। ग्रीन नेट लगाने से पौधों के विकास की दर 85 प्रतिशत बढ़ जाती है।

जीवामृत बनाने की विधि

10 किलो गाय का गोबर, 10 किलो गाय का मूत्र, एक किलो गुड़, एक किलो बेसन, 100 ग्राम पीपल के नीचे की मिट्टी को लेकर प्लास्टिक के ड्रम में 200 लीटर पानी में घोल देते हैं। 48 घंटों के ड्रम को बोरी से ढक देते हैं। सुबह शाम एक लकड़ी से घड़ी की सुई की दिशा में घोल को चला देते हैं। इस प्रकार से जीवामृत तैयार हो जाता है। जीवामृत का प्रयोग करने से खाद का प्रयोग नहीं करना पड़ता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).