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किसानों को रुला रहा दो रुपये किलो बिकने वाला टमाटर

सोनभद्र/बाराबंकी/कानपुर देहात। "साहब मैंने 15 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से खेत रेहन (किराए) पर लिया था, जिसमें टमाटर लगाया। सोचा था कि पिछले साल की तरह इस बार भी टमाटर की खेती में मुनाफा होगा। तब पत्नी का इलाज बनारस में कराऊंगा, लेकिन इस बार तो टमाटर का रेट न के बराबर मिल रहा है। लागत तक नहीं निकल रही है। लगता है अब घर गिरवी रख कर पैसे चुकाने पड़ेंगे।" यह कहना है सोनभद्र के धोरावल ब्लॉक के करकोली गाँव शंकर मौर्य (48 वर्ष) का। असल में, इस साल मौसम अनुकूल होने की वजह से टमाटर का उत्पादन बहुतायात में हुआ है। मगर नोटबंदी की वजह से टमाटर बाहर नहीं जा सका और टमाटर के दाम गिर गये। इस समय बाजार में टमाटर 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है।

किसानों को फूटी कौड़ी मिलने की संभावना नहीं

टमाटर की खेती आठ महीने की है। उत्तर प्रदेश के कई जिले के किसान बताते हैं कि अगस्त-सितंबर में हम टमाटर बोते हैं। ढाई से तीन महीने में पौधों में टमाटर फलने लगते हैं। एक पौधे से महीने में चार या पांच बार करके 20 बार टमाटर तोड़ा जाता है। मार्च तक टमाटर फलता रहता है। इसमें मुनाफा हो ही जाता है, लेकिन इस बार पूरा मामला उलटा है। जिन खेतों में आठ माह तक मेहनत की गई या की जा रही है, उनसे किसानों को एक फूटी कौड़ी मिलने तक संभावना नहीं है।

किसानों के चेहरों पर मायूसी, नहीं निकल रही लागत भी

सोनभद्र जिले में टमाटर की खेती के लिए मशहूर करमा और घोरावल के किसान इस वर्ष टमाटर के भाव में गिरावट के चलते मायूस नजर आ रहे हैं। बताते चले कि इस अंचल के किसान टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। यही कारण है कि यहां से प्रचुर मात्रा में टमाटर का निर्यात नेपाल से लेकर पाकिस्तान तक होता है। विगत दो वर्षों से बाहर निर्यात न होने व भाव में लगातार गिरावट होने से किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।

किसानों का हाल बद से बदतर हो गया

घोरावल ब्लॉक के केवली गाँव निवासी किसान भोला पटेल बताते हैं, "सात बीघे की टमाटर की खेती में तीन लाख की लागत लगाने के बाद अब इस बात की चिन्ता है कि कैसे भी केवल लागत भर निकल जाए।" राकेश मौर्या बताते हैं, "इस साल टमाटर की खेती जब शुरू हुई तो अतिवृष्टि के कारण दो-दो बार बीज का नुकसान होने से बीज का खर्च और मजदूरी दो से तीन गुना बढ़ने से व भाव 200 रुपए प्रति क्विंटल होने पर किसानों का हाल बद से बदतर हो गया है।"

पिछले साल 1800 रुपये प्रति क्विंटल था

खरूआव के एक किसान संजय पांडे बताते हैं, "टमाटर की खेती के लिए मैंने खेत सात से आठ हजार रुपये बीघे पर लिया है। टमाटर का भाव जमीन पर आने से तुड़ाई और ढुलाई देने के बाद कुछ भी नहीं बचता है।" संजय आगे बताते हैं, "पिछले साल 1800 रुपए प्रति क्विंटल की अपेक्षा इस साल टमाटर का भाव 200 रुपए प्रति क्विंटल होने से किसानों में निराशा व्याप्त है। 10 से 15 बीघा में टमाटर लगाने वाले किसानों को तीन से साढ़े तीन लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।

फायदा तो दूर की कौड़ी है

कानपुर देहात के रहने वाले किसान नन्हे कुशवाहा (40 वर्ष) बताते हैं, "इस बार नोटबंदी के कारण टमाटर का दाम बहुत कम हो गया है। इस सीजन में टमाटर 20 रुपये से कम नहीं रहता था, लेकिन अब जो सबसे अच्छा टमाटर होता है वो 15 रुपये किलो में जाता है। गाँव की बाजार जैसे-जैसे खत्म होती है, दाम भी 10, 8, 5 रुपए तक आ जाते हैं। इस बार लागत ही निकल आये तो अच्छा है फायदा तो दूर की कौड़ी है।"

20 रुपये किलो बिका था टमाटर

बाराबंकी के फतेहपुर ब्लाक के मोहम्मदपुर गाँव के किसान राम सेवक मौर्या बताते हैं, "इस समय हमारे खेतो में हर तीसरे या चौथे दिन लगभग 80 किलो से एक क्विंटल के बीच टमाटर निकलता है जो गाँव में ही सात से आठ रुपये प्रति किलो के भाव से बिक जाता है। टमाटर का इतना उत्पादन नहीं हो पाता कि टमाटर को मंडी में ले जाना पड़े। इस बार टमाटर के खेती का रकबा ज्यादा है जिससे टमाटर कम दामों में बिक रहा है। पिछले साल इसी सीजन में टमाटर 20 रुपये किलो बिकता था।"

क्या कहते हैं अधिकारी

टमाटर की फसल के लिए इस बार मौसम बहुत अनुकूल है, जिससे टमाटर की पैदावार पिछले वर्षों की अपेक्षा ज्यादा है। इस वजह से टमाटर कम दामों में बिक रहा है।
राम कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी, बाराबंकी
प्रदेश से बाहर के व्यापारी मंडी में नहीं आने के कारण सब्जियों के भावों में बिल्कुल मंदी पड़ी है। किसानों को इस बार बहुत बड़ा नुकसान होने के साथ सब्जियों की लागत तक नहीं मिल रही है।
राजीव कुमार भारती, जिला कृषि अधिकारी, सोनभद्र
नोटबंदी के कारण व्यापार नहीं हो पा रहा है। टमाटर की पैदावार इस बार अच्छी हुई है। अभी तो टमाटर का उत्पादन शुरू हुआ है, जल्द ही टमाटर का भाव भी बढ़ने लगेगा।
नलिन सुंदरम भट्टू, जिला उद्यान अधिकारी, सोनभद्र
इस बार मौसम टमाटर की फसल के अनुसार रहा, जिस वजह से टमाटर का उत्पादन अधिक हुआ। नोटबंदी की वजह से टमाटर बाहर नहीं जा सका जो लोकल मार्केट में बिकने के लिए आया था। जिस वजह से भाव बहुत कम रहा। जल्द ही भाव बढ़ने की आशंका है।
जयराम वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी, शाहजहांपुर
इस बार का मौसम टमाटर उत्पाद के लिए अनुकूल था जिस वजह से पैदावार अधिक हुई। उद्यान विभाग की तरफ से इस बार काफी अच्छा बीज सब्सिडी पर बांटा गया था, जिस वजह से रकबा भी बढ़ा और पैदावार अधिक हो गई। नोटबंदी के कारण छोटे व्यापारी दूसरे प्रदेशों में टमाटर नहीं भेज पाएं, जिस वजह से घरेलू बाजार में ही इसकी बहुतायत हो गई। ऐसे में टमाटर के रेट बहुत कम हो गए हैं।
सुमित पटेल, जिला कृषि अधिकारी, औरैया
नवंबर, दिसंबर, जनवरी महीनों में सबसे अधिक टमाटर का उत्पादन किया जाता है। असल में होता यह है कि पिछले कई वर्षों से टमाटर शिमला, देहरादून, नैनीताल इन जगहों से आता था, जिसमें लागत भी होती थी, जिस वजह से टमाटर सस्ता नहीं होता था। लेकिन इस बार स्थानीय आवक ज्यादा हो गई इसलिए बाहर से टमाटर नहीं आ मंगाया जा रहा है, ऐसे में लागत नहीं आ रही है। स्थानीय टमाटर ज्यादा होने की वजह से टमाटर सस्ता बिक रहा है।
डॉ. दिनेश चन्द्र, सह निदेशक कृषि विदेश व्यापार एवं विपणन मंडी परिषद, उत्तर प्रदेश

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