‘आधुनिक युग में योग का विशेष महत्व’

‘आधुनिक युग में योग का विशेष महत्व’gaonconnection

बाराबंकी। स्वास्थ्य के लिए योग का मानव जीवन में विशेष स्थान है। योग आज के अति आधुनिक युग में अतिमहत्वपूर्ण हो जाता है। जब मानव शरीर प्रदूषण की चपेट में हो तब योग और स्वच्छता के प्रति ग्रामीण एवं शहरी युवाओं को जागरूक होकर भविष्य में आने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है। 

यह बातें जिला युवा समन्वयक प्रदीप सिंह ने राजकीय इण्टर कालेज बाराबंकी के ऑडीटोरियम में मंगलवार को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में कहीं। राज्य स्तरीय योग प्रशिक्षक दिनेश कुमार सिंह नैचूरो पैंथी संस्था लखनऊ के द्वारा योगाभ्यास कराया गया। योग प्रशिक्षक ने बताया कि योग प्राचीन भारतीय परम्परा एवं संस्कृति अमूल्य देन है। योग शरीर एवं मन, विचार एवं क्रम, आत्मसंयम एवं पूर्णता की एकात्मकता तथा मानव एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य प्रदान करता है। योग व्यायाम ही मात्र नहीं है बल्कि स्वयं के साथ विश्व एवं प्रकृति के साथ एकत्व खोजने का भाव है। योग हमारी जीवन शैली में परिवर्तन लाकर हमारे अन्दर जागरुकता उत्पन्न करता है। दिनेश कुमार ने कहा कि प्रकृति परिवर्तनों से शरीर में होने वाले बदलाव को सहन करने में सहायक हो सकता है।”    

समस्त प्रतिभागियों को योग से सम्बन्धित 15 क्रियाओं प्रार्थना शिथिलीकरण के अभ्यास, योगासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, अर्धचक्रासन, शंशाकांसन वक्रासन, भुजंगासन, सलभासन, मकरासन, सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन, शवासन, कपालभाति, प्राणायम, भ्रामरी प्राणायम, अनुलोम-विलोम प्राणयाम आदि आसनों और इनसे होने वाले शारीरिक लाभों के बारे में बताया। 

प्राणायाम से होता है श्वास संबंधी आवेगों का नियंत्रण

बाराबंकी। आयुष मंत्रालय के सहयोग से आदर्श सेवा संस्थान द्वारा एक दिवसीय ‘कल्याण के लिए योग’ विषयक सेमिनार का आयोजन सर्वोदय बाल विद्या मंदिर इण्टर कालेज मरकामऊ बाराबंकी में आयोजित किया गया। सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व निदेशक आयुर्वेद एवं यूनानी सेवा डॉ. जीडी गौतम ने प्राणायाम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि श्वास सम्बंधी आवेगों का नियन्त्रण प्राणायाम से होता है। जो स्वायत्त तंत्रिका आवेगों की धारा के लिए एक मार्ग सुनिश्चित करता है। प्राणायाम में श्वास को अन्दर भरने को पूरक तथा बाहर छोड़ने को रेचक कहा जाता है। प्राणायाम ध्यान के उच्च स्तरीय अभ्यास के लिए भी उपयोगी है। डॉ. गौतम ने योग साधकों को बताया कि प्राणायाम करते समय बहुत सी बातों की सावधानियां भी रखनी होती हैं। उन्होंने कहा कि मन को शांत रखना चाहिए तथा तनाव रहित होकर या जल्दबाजी में कोई भी योगाभ्यास नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

प्राणायाम से होता है श्वास संबंधी आवेगों का नियंत्रण

बाराबंकी। आयुष मंत्रालय के सहयोग से आदर्श सेवा संस्थान द्वारा एक दिवसीय ‘कल्याण के लिए योग’ विषयक सेमिनार का आयोजन सर्वोदय बाल विद्या मंदिर इण्टर कालेज मरकामऊ बाराबंकी में आयोजित किया गया। सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व निदेशक आयुर्वेद एवं यूनानी सेवा डॉ. जीडी गौतम ने प्राणायाम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि श्वास सम्बंधी आवेगों का नियन्त्रण प्राणायाम से होता है। जो स्वायत्त तंत्रिका आवेगों की धारा के लिए एक मार्ग सुनिश्चित करता है। प्राणायाम में श्वास को अन्दर भरने को पूरक तथा बाहर छोड़ने को रेचक कहा जाता है। प्राणायाम ध्यान के उच्च स्तरीय अभ्यास के लिए भी उपयोगी है। डॉ. गौतम ने योग साधकों को बताया कि प्राणायाम करते समय बहुत सी बातों की सावधानियां भी रखनी होती हैं। उन्होंने कहा कि मन को शांत रखना चाहिए तथा तनाव रहित होकर या जल्दबाजी में कोई भी योगाभ्यास नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

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