'अच्छी बारिश से किसान नहीं उद्द्योगों के दिन बहुरेंगे'

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लखनऊ। दो साल लगातार सूखा झेलने के बाद कई खाद्य आवश्यकताओं को दूसरे देशों से मंगाकर पूरा करने को मजबूर भारत और उसके किसानों के लिए अच्छी खबर हो सकती है। मौसम की जानकारी देने

वाली निजी संस्थाएं इस साल मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान बता रही हैं, राष्ट्रीय संस्थाएं भी इस दिशा में इशारा कर रही हैं।

वहीं देश के विभिन्न मुद्दों पर चिंतन और नीति बनाने के जिम्मेदार राष्ट्रीय संस्था नीति आयोग के अनुसार अगर मौसम विभाग की भविष्यवाणी सटीक बैठी और इस बार मॉनसून सामान्य रहा तो वर्ष 2016-17 में कृषि विकास दर 6% तक पहुंच सकती है। आयोग के हिसाब से 5% विकास के साथ भी किसानों की आमदनी में काफी सुधार होगा। हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया है कि उत्पादन बढ़ने की स्थिति में यदि सरकार ने उचित कदम उठाकर न्यूनतम मूल्य किसान को न दिलाया, तो अनाज सस्ते दामों पर बिकेगा, जिसका किसान को खास फायदा नहीं होगा।

मौसम का अनुमान लगाने वाली राष्ट्रीय स्तर की निजी संस्था स्काइमेंट वेदर ने अनुमान जारी किया है कि 1 जून से 30 सितंबर तक 89 सेमी बारिश हो सकती है, जिसे सामान्य माना जाता है। हालांकि इस संस्था के पिछले वर्ष के मॉनसून के अनुमान गलत साबित हुए थे। लेकिन राष्ट्रीय संस्था के अनुमान भी इसी दिशा में हैं।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष बारिश सामान्य होने की संभावना है क्योंकि अल-नीनो प्रभाव जिसके कारण पिछले दो मॉनसून कमज़ोर रहे की स्थिति कमजोर होती जा रही है जिसके मई तक 0.5 स्केल से नीचे जाने की संभावना है। ऐसी हालत में ये मॉनसून को किसी भी तरह प्रभावित नहीं करता। नीति आयोग के अनुमान के अनुसार अगर मॉनसून समय पर आता है और बारिश सभी क्षेत्रों में होती है तो अनाज की पैदावार बढ़ेगी, जिसका देश के आर्थिक विकास पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

वर्ष 2015-16 में कृषि क्षेत्र की विकास दर 1.20 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो इससे पिछले साल 0.25 प्रतिशत तक लुढ़क गई थी। पिछले लगातार दो मॉनसून में बारिश सामान्य से कम रही है। वर्ष 2014-15 में ये सामान्य से 12% और 2015-16 में सामान्य से 14% कम रही थी।  इसके प्रभाव देश के खाद्यान्न उत्पाद पर यह पड़ा कि भारत, जो कि मक्का, सोयामील और गेहूं जैसे उत्पादों का  सबसे बड़ा निर्यातक हुआ करता था, अब देश में इनकी कमी पूरी करने के लिए खुद दूसरे देशों से होने वाली खरीद पर निर्भर है।

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