'बैंक और साहूकारों के बोझ से मेरे पति मर गये'

बैंक और साहूकारों के बोझ से मेरे पति मर गयेगाँव कनेक्शन

लखनऊ बैंक और साहूकारों के कर्ज के बोझ के तले मेरे पति और बड़े बेटे ने ख़ुदकुशी कर ली। फसल भी मौसम के कारण ख़राब हो गयी थी। लेकिन अगर सरकार साथ देती तो आज मेरे पति जिन्दा होते कहते-कहते अचानक राजेश्वरी के आँखों में आंसू आ गए।

सीतापुर जिले के नरही गाँव का यह परिवार सोमवार 21 दिसम्बर को राजधानी में प्रदेश भर के किसानों के साथ मुख्यमंत्री से अपनी बात कहने आये थे। 

सुबह से ही राजधानी लखनऊ में अलग-अलग जिलों के किसान एकत्रित हुए थे। किसान मंच के बैनर तले शेखर दिक्षित के नेतृत्व में सैकड़ों किसानो ने अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुँचाने की कोशिश की। शेखर दिक्षित ने बताया कि राजेश्वरी के पति उमेश चंद्र शर्मा एक किसान थे, जिन्होंने खेती के लिए भूमि विकास बैंक से 40 हज़ार रुपए व अन्य साहूकारों से लगभग एक लाख रुपए क़र्ज़ के रूप में लिया था, लेकिन उनकी फसल ख़राब मौसम के कारण तबाह हो गयी, सरकार से भी कोई मदद नही मिली मज़बूरन उन्होंने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाया। पिता के इस फैसले से अवसाद में आये उनके बड़े बेटे दिनेश चन्द्र ने भी कुछ समय बाद आत्महत्या करने पर मजबूर हो गया। अब उनके घर में उनके परिवार को देखने वाला भी कोई नही है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके दूसरे बेटे जो मूकबधिर है उस पर आ गयी है।

शेखर दिक्षित ने कहा कि प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये के कारण प्रदेश का किसान आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर है, क्योँकि सरकार किसानों को डीज़ल, खाद, बीज, बिजली समय पर उपलब्ध नही करा पा रही है। अगर सरकार का यही रवैया रहा तो दिन पर दिन किसान आत्महत्या करने को मजबूर होते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि किसानों की फसले बेमौसम वर्षा व सूखे के कारण तबाह तबाह हो गयी थी, जिसके मुआवजे के लिए सूबे की सरकार ने एलान किया था लेकिन यह लाभ कुछ ही किसानों को मिल पाया। क्योँकि मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार किया गया है।

किसानों ने सरकार से मांग की कि आत्महत्या करने वाले किसानों 15-15 लाख रुपए दिए जाए साथ ही परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी सेवा में भी रखा जाए। मुआवजा वितरण में हुए धांधली की तुरंत जांच कराई जाए। गन्ना किसानों का भुगतान जल्दी कराया जाए, साथ ही प्रत्येक किसानों को 200 रुपए प्रति माह जीवन यापन के लिए भत्ता दिया जाए, जब तक उनकी माली हालत न सुधर जाए। वही गन्ने का मूल्य 400 रुपए प्रति कुंतल किया जाए। गेहूं-धान की फसलों का मूल्य डेढ़ गुना किया जाए। प्रदर्शन के दौरान उहोने अपना ज्ञापन प्रशासन द्वारा भेजे गए आलाधिकारियों को सौपा, जिसमें उन्होंने प्रशासन को दो दिन का समय दिया और कहा की अगर सरकार जल्दी ही हमारी मांगो को नही मानती है तो वह किसानों के साथ प्रदेशव्यापी आंदोलन करने को वह मज़बूर हो जायेंगे। 

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