बंजर बुंदेलखंड के किसान भी करेंगे केले की खेती

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लखनऊ। बुंदेलखंड के चित्रकूट के किसान जल्द ही केले की खेती करके लाभ कमाएंगे। ऐसा संभव होगा चित्रकूट के कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रयास से। केवीके अपने फार्म में केला की खेती की शुरुआत कर किसानों को इसकी जानकारी दे रहा है।

चित्रकूट के गनीवां में किसानों को उन्नत खेती के गुर सिखाने के लिए कई वर्षों से कृषि विज्ञान केन्द्र काम कर रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र किसानों की व्यवसायिक खेती की ओर रुझान बढ़ाने के लिए कई वर्षों से काम कर रहा है। अब तक सैकड़ों किसानों को औषधीय खेती की जानकारी दी है, जिससे यहां के किसान अपना भी रहे हैं। अब कृषि विज्ञान केन्द्र ने केला की खेती की भी शुरुआत कर दी है।

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार बताते हैं, "अभी तक लोगों को लगता है कि यहां पर केले की खेती नहीं की जा सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है, यहां पर भी केला की खेती की जा सकती है। यहां का वातावरण और मिट्टी दोनों केला की खेती के लिए अनुकूल है।"

वो आगे कहते हैं, "नदी के किनारे के क्षेत्र और जिन किसानों के पास सिंचाई की अच्छी सुविधा है, वो इसकी खेती कर सकते हैं। केला ऐसी फसल है जो किसानों को अच्छा फायदा होता है।"

उत्तर प्रदेश के सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, कौशाम्बी जिले में बड़े मात्रा में केला की खेती होती है। एक दशक पहले तक इन जिलों में भी केला दूसरे प्रदेशों से आता था। लेकिन अब यहां से दूसरे प्रदेशों में केला भेजा जाता है। अब इस सूची में चित्रकूट का नाम भी जुड़ जाएगा। यहां की मिट्टी भी केला की खेती के लिए उर्पयुक्त है।

कृषि विज्ञान केन्द्र के फार्म पर प्रयोग के तौर पर इस बार बीघा खेत में लगभग 450 पौधे लगाए थे, जिनमें अब फल भी लग गए हैं। डॉ. प्रवीण कुमार कहते हैं, "हमने प्रयोग के रूप में पौधे लगाए थे, जो पूरी तरह से तैयार हो गए हैं। हमारे हर दिन किसान आते रहते हैं, केला की फसल देखकर वो भी केला की खेती करने वाले हैं।"

चित्रकूट के गनीवां में दीन दयाल शोध संस्थान के साथ कृषि विज्ञान केन्द्र काम कर रहा है। दयाल शोध संस्थान के हरेश्याम मिश्रा बताते हैं, "अभी तक चित्रकूट में मध्य प्रदेश से केला आता है, जब यहां के किसान केला की खेती करने लगेंगे, तब यहां की बाजार में यहीं के किसानों का केला आएगा।"

डॉ. प्रवीण कुमार कहते हैं, "यहां का मौसम केला की फसल के लिए अनुकूल है, बस ज्यादा गर्मी पड़ने पर पत्तियों के सिरे मुर्झाने लगते हैं, जिससे पौधों कोई नुकसान नहीं होता है।"

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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