इलाज के नाम पर मरीजों से वसूली

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राबरेली (लखनऊ)। भले ही सरकार मरीजों के मुफ्त इलाज का दावा करती है लेकिन गाँवों में खुले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के नाम पर मरीजों के साथ जमकर उगाही की जा रही है। ऐसा ही मामला जतुआटप्पा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिला। 

जिला मुख्यालय से 11 किमी दूर जतुआटप्पा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चारों तरफ अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। यहां पर भर्ती मरीजों को इलाज करवाने के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं। बिना रुपए के मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में गरीबों को मुफ्त इलाज किया जाता है लेकिन यहां रुई खरीदने तक के पैसे ले लिए जाते हैं। अस्पताल से उपलब्ध होने वाली दवाइयों को बाजार से खरीदना पड़ता है। गाँव पुरई की एक महिला को बुखार आ जाने से खून की कमी हो गई थी। 

जब वह सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने लिए गई तो डाक्टर ने ग्लूकोज चढ़ाने के लिए 100 रुपए मांगे और कहा कि अगर रुपए नहीं देंगे तो इलाज नहीं किया जाएगा। उसने बताया कि अधिकांश महंगी दवाएं सादे पर्ची पर लिखकर बाहर से मंगाई जाती हैं।

सौ रुपए देने पर चढ़ाया ग्लूकोज

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती मरीज प्रीति सिंह (45 वर्ष ) बताती है, “मुझे डाक्टर रचना कटियार ने ग्लूकोज चढ़वाने के लिए कहा और मुझे भर्ती कर लिया गया। जब नर्स मेरे ग्लूकोज चढ़ाने के लिए आई और कहा कि अगर 100 रुपए दोगी तो ही ग्लूकोज चढ़ाया जाएगा वरना नहीं चढ़ाया जाएगा। मुझे मजबूरन 100 रुपए देना पड़ा और तब ग्लूकोज चढ़वाया गया।”

इंजेक्शन लगाने को ले लिए डेढ़ सौ रुपए 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीज रविकुमार (25 वर्ष) बताते हैं, “मेरे पेट में दर्द हो रहा था। दर्द का इन्जेकशन लगाने के लिए मुझसे 150 रुपए नर्स ने लिया और कहा कि जो दवाई लिखी हैं वह दवाई अन्दर नहीं मिलेगी इसे बाहर से लेना पडे़गा लेकिन वह दवाई अन्दर ही उपल्ब्ध थी। सरकारी अस्पताल में गरीबों को मुफ्त इलाज किए जाने की बात सुनी थी लेकिन यहां रुई खरीदने तक के पैसे ले लिए जाते हैं।”

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