‘जेई’ पीड़ित बच्चों में विकलांगता को खत्म करने की कोशिश

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लखनऊ। बरसात का मौसम आते ही जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) नामक बीमारी का कहर शुरू हो जाता है। बीमारी सबसे ज्यादा बच्चों को चपेट में लेती है जिससे कईयों की मौत हो जाती है तो कई विकलांग हो जाते हैं। लेकिन अब इन बच्चों की विकलांगता को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। क्योंकि केजीएमयू समेेत प्रदेश के तीन अस्पतालों में इन्सेफेलाइटिस रिहैबिलिटेशन सेन्टर बनाए जा रहे हैं।

वर्ष 1971 में इस बीमारी ने जापान में दस्तक दी थी। प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में इसका जुलाई से सितंबर माह काफी असर रहता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1978 से 2014 तक प्रदेश में इससे 50 हजार से भी ज्यादा मौतें हुई हैं।

केजीएमयू में जापानी इन्सेफेलाइटिस का शिकार हुए विकलांग बच्चों के इलाज के लिए प्रदेश सरकार ने पाँच करोड़ रुपये दिए हैं। इससे आधुनिक मशीनें मंगाई गई हैं, साथ ही केजीएमयू के लिम्ब सेन्टर में इन्सेफेलाइटिस रिहैबिलिटेशन सेन्टर भी बनाया गया है। प्रदेश के तीन शहरों पुर्नावास केन्द्र गोरखपुर, बीआरडी मेडिकल कालेज, बीएचयू और केजीएमयू में इन्सेफेलाइटिस रिहैबिलिटेशन सेन्टर बनाया जा रहा है। तीनों केंद्रों के लिए 15 करोड़ का बजट दिया गया है।

बाल विभाग की विभागाध्यक्ष डाक्टर रश्मि कुमार ने कहा, “जापानी इन्सेफेलाइटिस से हुई विकलांगता से लड़ने के लिए केजीएमयू लगभग तैयार है। ज्यादातर मोटराइज्ड व्हील चेयर, गेट लैंब राऊटर विद डस्ट मशीनें आ चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि कुछ आधुनिक मशीनें अभी आना बाकी है। भर्ती प्रकियां शुरू कर दी गयी है। भर्ती प्रकिया शुरू होने के साथ ही यह सुविधा केजीएमयू में शुक्रवार से शुरू हो गई है।” डाक्टर रश्मि कुमार का कहना है कि इस सेंटर में इस बीमारी से विकृत बच्चों को ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा दी जाएगी और विकलांगता को खत्म करने की कोशिश की जाएगी।  केजीएमयू के लिम्ब सेंटर के सेकेण्ड फलोर पर दस बेड के इस सेंटर में पाँच बेड लड़कों और पाँच बेड लड़कियों के लिए उपलब्ध हैं।

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