‘लावारिस वाॅर्ड’: लाशों जैसी जि़ंदगी बिताते मरीज़

‘लावारिस वाॅर्ड’: लाशों जैसी जि़ंदगी बिताते मरीज़gaoconnection

लखनऊ। गोला गंज स्थित बलरामपुर अस्पताल में एक लावारिस वॉर्ड चलाया जाता है जहां उन मरीजों का इलाज और देखभाल किया जाता है, जिनका कोई परिजन नहीं, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने भी इस वॉर्ड के मरीजों को लावारिस छोड़ दिया।

गद्दे गायब हैं, हैं भी तो कटे-फटे। कई मरीज़ कमजोर से बेड पर पड़े हैं तो कुछ बेड की कमी में मैली ज़मीन पर ही लेटे हैं। इन मरीज़ों को किसी जेल की तरह दो वक्त का खाना दे दिया जाता है। इसके अलावा न तो कोई वॉर्ड ब्वॉय यहां दिखता है न ही सफाई कर्मचारी यहां के शौचालय की सफाई करने आता है। मरीजों के अनुसार डॉक्टर भी कभी-कभी ही आते हैं। 

“डॉक्टरों का जब मन करता है तब आकर देख लेते हैं। एक-एक हफ्ते बीत जाते हैं डॉक्टर इधर राउंड भी नहीं लेते। यहां कुछ लोग आकर कभी-कभी कुछ पैसे दे जाते हैं, उसी से कभी-कभार चाय मंगाकर पी लेते हैं,” वॉर्ड में भर्ती मरीज़ अनूप मिश्रा बताते हैं। 

अनूप के परिवार में सभी की मृत्यु हो चुकी है। एक दुर्घटना में पैर की हड्डी टूटने के बाद से पिछले आठ महीनों से यहीं भर्ती हैं। 

वहीं बस्ती ज़िले की कुसुम को उसके पति ने शादी के कुछ दिन बाद ही घर से निकाल दिया था। जब मायके में भी नहीं अपनाया गया तो कुसुम भीख मांगकर अपना पेट पाल रही थी, दो महीने पहले एक बाइकसवार ने ठोकर मार दी तो पैर टूट गया, और उन्हें लोगों ने लावारिस वॉर्ड में भर्ती करा दिया। “यहां प्यास लगने पर कोई पानी देने वाला नहीं है। कभी-कभी वार्ड ब्वॉय आकर पानी दे जाता है। पैर टूटा है इसलिए खुद शौच जाने में बहुत दिक्कत होती है। सफाई-कर्मी भी कम ही इधर आते हैं” कुसुम ने बताया।

इस बारे में जब बलरामपुर अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव लोचन से गाँव कनेक्शन ने बात की तो उन्होंने बताया कि लावारिस वार्ड में हर प्रकार के मरीजों को जब तक वह ठीक नहीं हो सही से रखा जाता है।

उन्होने आगे बताया ''उन्हें दो वक्त का खाना दिए जाने के साथ-साथ यहां उनका इलाज किया जाता है। इन मरीजों के लिए वॉर्ड ब्वॉय को खासतौर पर रखा जाता है। शौच आदि के लिए उनके कमरे से सटा हुआ शौचालय भी बनवा दिया गया है।''

रिर्पोटर - ज्योत्सना सिंह

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