‘लेडी टार्जन’ के नाम प्रसिद्ध जमुना टुडू

‘लेडी टार्जन’ के नाम प्रसिद्ध जमुना टुडूगाँव कनेक्शन

घाटशिला। झारखंड की आर्थिक राजधानी जमशेदपुर से 47 किमी दूर घाटशिला में स्थित चाकुलिया में रहती हैं जमुना टुडू। लोग उन्हें ‘लेडी टार्जन’ के नाम से बुलाते हैं। इन्होंने जंगल की अवैध कटाई पर अपने बलबूते लगाम लगा दी है। 

इस काम में गाँव के किसी भी पुरुष ने उनका साथ नहीं दिया तो इन्होंने चार महिलाओं के साथ जंगलों में पेट्रोलिंग शुरू की। वे जंगल माफिया से भिड़ जाती हैं। ये कई बार लहूलुहान होकर गाँव वापस लौटीं। जमुना ने स्कूल व नलकूप के लिए अपनी जमीन भी दान में दे दी। 2013 में जमुना को “फिलिप्स ब्रेवरी अवाॅर्ड’ से सम्मानित किया गया। 

दिल्ली की एक टीम उन पर डॉक्युमेंट्री बना चुकी है। 2014 में उनको स्त्री शक्ति अवाॅर्ड दिया गया। 2016 में उनको राष्ट्रपति ने भारत की प्रथम 100 महिलाओं में चुना गया और राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया।

शादी के बाद की शुरुआत

इस मुहिम की शुरुआत सन 2000 के आस-पास हुई, जब जमुना की शादी चाकुलिया मतुरखम गाँव में हुई। जमुना ने देखा कि आस-पास का इलाका वन सम्पदा से भरपूर था, लेकिन लगातार कटाई जारी है। जमुना ने लोगों से कहा कि सबको मिलकर जंगलों को कटने से रोकना होगा। गाँव के किसी भी पुरुष ने उनका साथ देने से इंकार कर दिया, लेकिन औरतें आगे आईं। 

‘महिला वन रक्षक समिति’ का किया गठन

सन 2004 में केवल चार महिलाओं के साथ मिलकर जमुना ने जंगलों में पेट्रोलिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे ये संख्या बढ़कर 60 तक जा पहुंची। उन्होंने ‘महिला वन रक्षक समिति’ का गठन किया। ये समिति वनों को कटने से बचाने के साथ नए पौधे लगाकर वनों को सघन बनने में भी योगदान देने लगीं।

वृक्षों को राखी बांधता है पूरा गाँव

आज जमुना के गाँव में बेटी पैदा होने पर 18 ‘साल’ पौधों का रोपण किया जाता है। बेटी के ब्याह के वक्त 10 ‘साल’ वृक्ष परिवार को दिए जाते हैं। रक्षाबंधन पर सारा गाँव वृक्षों को राखी बांधता है। 

फिर पुरुषों ने भी दिया जमुना का साथ

सन 2008 में रेंजर अमरेंद्र कुमार सिंह ने देखा कि महिलाओं ने लगभग 50 हेक्टेयर की भूमि में वनों को नवजीवन दे दिया है। जल्दी ही उन्होंने वन विभाग की मदद से गाँंव में पीने के पानी की व्यवस्था करवा दी। अब पुरुषों ने भी जमुना का साथ देना शुरू कर दिया। अवैध कटाई करने वालों से मुकाबले में कई बार जान पर बन आई, लेकिन आज जमुना के गाँव में हर कोई जंगलों को बचाने में लगा है।

रिपोर्टर - अम्बाती रोहित 

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