पाकिस्तानी हिन्दुओं की मदद, मोदी का सराहनीय कदम

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मोदी सरकार ने पाकिस्तान से बचते-बचाते भारत आए हिन्दुओं को इज्जत के साथ जीने का मौका देने का वादा किया है। बाबासाहब अम्बेडकर ने बंटवारे के बाद वहां बचे हिन्दुओं से यही कहा था कि भारत आ जाओ, हम सम्मान और सुरक्षा की गारन्टी लेते हैं लेकिन 1950 में नेहरू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के साथ समझौता करके हिन्दुओं का यह रास्ता बन्द कर दिया था। पिछले साठ साल में अपनी जान बचाकर हिन्दू अगर आए भी तो दर-दर भटकते रहे शरणार्थी कैम्पों में। उनका कुसूर क्या था।

जब जवाहर लाल नेहरू ने मज़हबी आधार पर भारत के बंटवारे पर जिन्ना के साथ दस्तखत किए थे तो इतना तो उन्हें मालूम था कि पाकिस्तान मुसलमानों का मुल्क होगा। तब करोड़ों हिन्दुओं को पाकिस्तान में किसके भरोसे छोड़ दिया था। मुसलमानों को तो पाकिस्तान मिल गया लेकिन पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए इंसानियत भुलाकर भारत का दरवाजा भी बन्द कर दिया।

नेहरू ने महात्मा गांधी की बात नहीं मानी और भारत का मज़हबी बंटवारा जिन्ना के साथ राउन्ड टेबल पर स्वीकार कर लिया और सेक्युलरवाद मर गया। उसके बाद नेहरू ने देश के महान कानूनविद् और संविधान निर्माता बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर की बात नहीं मानी, जिन्होंने आबादी की अदला-बदली का सुझाव दिया था। भारत के हिन्दू अपनी नादानी में अखंड भारत का सपना देखते रहे और कड़वी सच्चाई का सामना नहीं किया।

बंटवारे के विस्तार में न भी जाएं तो आसानी से कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में माइनॉरिटी की समस्या नहीं है और जमीन पर आबादी का बोझ भी कम है। वहां प्रति वर्ग किलोमीटर 240 की आबादी है जब कि भारत में 436 की। सोचने का विषय है कि उन्होंने अपनी माइनॉरिटी का क्या किया। उससे भी ताज्जुब की बात है कि दुनिया के पत्रकारों को भी यह समस्या समझ में नहीं आई जो दिन-रात मानवाधिकार की बातें करते नहीं थकते।

देखना यह है कि मोदी सरकार के इस कदम की आलोचना कौन करता है। शायद इतना साहस तो विपक्ष में नहीं होगा कि प्रशंसा करे। यदि कोई विरोध नहीं करता तो अब तब इंसानियत का तकाजा क्यों नहीं समझ में आया। सभी को मालूम था कि कराची और लाहौर में हिन्दुओं की आबादी आधे से अधिक थी और ये शहर भारत में आने चाहिए थे लेकिन नेहरू ने इस पर जोर नहीं दिया और रेडक्लिफ अवॉर्ड स्वीकार कर लिया इसलिए बेसहारा पाकिस्तानी हिन्दुओं की समस्या आज की नहीं है। अभी भी समय है पाकिस्तानी हिन्दुओं को बुलाकर कश्मीर घाटी में बसा दिया जाए। दोनों समस्याएं एक साथ हल हो जाएंगी लेकिन यह आसान नहीं है।

sbmisra@gaonconnection.com

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