‘फ्लड प्लेन जोनिंग विधेयक लाने पर विचार कर रही है सरकार

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नई दिल्ली (भाषा)। देश के अलग-अलग हिस्सों में हर वर्ष आने वाली बाढ़ की विभीषिका और इसके कारण जानमाल की क्षति और मुआवजे की समस्याओं से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ‘फ्लड प्लेन जोनिंग' विधेयक लाने पर विचार कर रही है।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा, ‘‘खेती को सुचारु रुप से आगे बढ़ाने के लिए हर वर्ष आने वाली बाढ़ से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देना जरुरी है। इसे ध्यान में रखते हुए हम ‘फ्लड प्लेन जोनिंग' विधेयक लाने पर विचार कर रहे हैं।'' बाढ़ योजना से जुड़े मॉडल विधेयक में बाढ़ क्षेत्र प्राधिकार, सर्वे, बाढ़ प्रभावित मैदानों का चित्रण, बाढ प्रभावित मैदानों की अधिसूचना की सीमा तय करना, बाढ़ मैदानों के उपयोग को रोकने के साथ मुआवजा और अवरोध या अतिक्रमण हटाने की बात कही गई है।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि फ्लड प्लेन जोनिंग पर एक मॉडल विधेयक 1975 में सभी राज्यों को भेजा गया था जिसमें राज्यों को कानून बनाने में मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। 1978 में मणिपुर ने फ्लड प्लेन जोनिंग विधेयक पारित किया लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सीमांकन अभी तक नहीं किया जा सका है।

उत्तराखंड सरकार ने 16 दिसंबर 2012 को फ्लड प्लेन जोनिंग विधेयक पारित किया लेकिन यहां भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सीमांकन अभी तक नहीं किया जा सका है। बिहार और उत्तरप्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दायरा काफी बड़ा होने के आधार पर इसे लागू करने में कठिनाइयों के बारे में सूचित किया है। उमा भारती ने कहा कि हम राज्यों के साथ विचार विमर्श के आधार पर आमराय कायम करेंगे।

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