‘साहब! मैं जिंदा हूं, पेंशन दिलवा दीजिए’

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लखनऊ। “साहब मैं अभी जिंदा हूं। जिंदा होने का प्रमाण देने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुकी हूं। बूढ़ा जामा (शरीर) भी साथ नहीं दें रहा। खुद को जिंदा साबित करने के लिए हर चौखट पर फरियाद लगाई है। साहब! हमें पेंशन दिला दो।’’

बुजुर्ग लीलावाती (62 वर्ष) ने महिलाबाद तहसील परिसर में जिलाधिकारी लखनऊ के सामने उम्मीद के साथ अपनी फरियाद लगाई। आसपास खड़े लोगों के साथ खुद जिलाधिकारी राजशेखर भी हैरान रह गए। उन्होंने मामले की जांच के निर्देश देते हुए बुजुर्ग को जल्द पेंशन दिलाने का आश्वासन दिया।राजधानी में विभिन्न योजना के पात्र लाभार्थिंयों तक सरकार योजना पहुंचाने में अधिकारी खेल कर रहे हैं। जिले में वृद्वा पेंशन और सरकार की तरफ से गरीब पात्रों को दी जाने वाले सच्चाई सामने आई है।

लखनऊ ज़िला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर मलिहाबाद तहसील के खड़ता गाँव की रहने वाली लीलावती को दो वर्ष पहले तक विधवा पेंशन मिल रही थी। लेकिन अब नहीं मिलती। वो नम आंखों से बताती हैं, दो साल पहले पेंशन लेने पहुंची तो बताया गया तुम मर चुकी हाे। अब अपने जिंदा होने के सबूत लेकर आओ। मैंने प्रधान से लेकर ब्लाॅक तक के अधिकारियों से फरियाद लगाई लेकिन कुछ हुआ नहीं।”

लीलावती समाज कल्याण विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रही हैं। लीलावती के गाँव की मेढ़ाना (60 वर्ष) भी स्थानीय अधिकारियों की उदासनीता का शिकार हुई हैं। मलिहाबाद तहसील के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने उन्हें वृद्धा पेंशन जल्द से जल्द दिलाने का आश्वासन दिया। दोनों महिलाओं की पासबुक और दस्तावेज देखने के बाद उस पर मृतक लिखे जाने पर भी सवाल उठाए।

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