सहफसली खेती में बढ़ रही किसानों की रुचि

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बेलहरा (बाराबंकी)। जहां पहले बाराबंकी क्षेत्र के किसान गेहूं, धान और मोटे अनाजों की पैदावार को आय का एकमात्र ज़रिया मानते थे, वहीं अब यहां के किसानों ने इस सोच से आगे बढ़कर मिर्च और लहसुन जैसी सहफसली उत्पादों की खेती को कमाई का ज़रिया बनाया है। 

बाराबंकी क्षेत्र में रहने वाले छोटे व मझोले किसानों के लिए लहसुन व मिर्च की सह फसली खेती वरदान साबित हो रही है। बाराबंकी से 38 किमी. दूर उत्तर दिशा में कस्बा बेलहरा-भटुवामऊ एवं पास-पड़ोस के गाँवों में लगभग 100 एकड़ क्षेत्रफल में रबी की फसल में लहसुन की बुवाई की जाती है और इसी में मिर्च की बुवाई व रोपाई भी हो रही है।

बड़े स्तर पर मिर्च की खेती कर रहे किसान धनीराम राजपूत बताते हैं, ‘‘हमनें आधा एकड़ में लहसुन व मिर्च की खेती की है, जिसमें लगभग 35 हज़ार रुपए की लागत लगी है और इसमें हमें लागत हटाकर अब तक 30 से 40 हज़ार की कमाई हुई है।’’ ‘‘अगर कोई बीमारी (उकठा) का प्रकोप न हुआ तो मिर्च से लगभग 40 हज़ार रुपए की आमदनी और मिलने का अनुमान है।’’ धनीराम राजपूत आगे बताते हैं। 

श्रीचंद्र मौर्य ने इस वर्ष एक एकड़ में मिर्च व लहसुन बोई है, जिसमें उनकी लागत लगभग 75000 लगी है, अभी तक हुई आमदनी की बात करें तो श्रीचंद्र मौर्य ने लहसुन व मिर्च की सहफसली खेती से अभी तक दो से ढाई लाख रुपए की आमदनी कर चुके  हैं। 

जून-जुलाई मिर्च की खेती का सही समय

किसान जून-जुलाई में भी मिर्च की जी-4 जैसी किस्मों की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। जुलाई के दौरान रोपी गई फसल 30-35 दिन में तैयार हो जाती है। मिर्च हल्की सिंचाई की आवश्यकता वाली फसल है, इसलिए यदि मानसून कमजोर भी रहा तो भी किसानों की सिंचाई की लागत अन्य पारम्परिक फसलों के मुकाबले ज्यादा नहीं होगी। 

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