रवीश कुमार

रवीश कुमार

वरिष्ठ पत्रकार और एनडीटीवी सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं, प्राइम शो देशभर में चर्चित हैं। समाज के वो मुद्दे उठाते हैं बाकी जगह कहीं छिप से जाते हैं। आपका ब्लॉग कस्बा हिंदी भाषा का शुरुआती ब्लाग है।


  • अख़बारों के भीतर के पन्नों में छिपतीं अर्थव्यवस्था में गिरावट की ख़बरें

    बिजनेस अख़बारों में एक चीज़ नोटिस कर रहा हूं। अर्थव्यवस्था में गिरावट की ख़बरें अब भीतर के पन्नों पर होती हैं। कोर सेक्टर में आई गिरावट की ख़बर पहने पन्ने पर छपा करती थी लेकिन इसे भीतर सामान्य ख़बर के तौर पर छापा गया था।रोज़गार के लिए सभी की निगाहें मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर होती हैं। इस बार जो...

  • कृषि मंत्री जी, फ़सल बीमा को लेकर कोई खेल तो नहीं हो रहा है 

    प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना के बारे में CAG की रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट में 2011 से लेकर अगस्त 2016 तक की बीमा योजनाओं की ऑडिट की गई है। पहले NAIS, MNAIS, WBCIS नाम की फ़सल बीमा याजनाएं थीं, जिन्हें एकीकृत कर प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना कर दिया गया है। हमने फसल बीमा से संबंधित कुछ बयानों और...

  • रवीश कुमार का लेख ‘... तो गुस्से में आदमी हत्यारा बन जाता है’

    उरी सेक्टर में मोबाइल फोन को लेकर एक जवान ने मेजर को जान से मार दिया। मेजर ने सीमा पर तैनात जवान से फोन पर बात करने से मना किया और फोन ज़ब्त कर लिया। इसे लेकर दोनों में कुछ बहस हो गई और जवान ने मेजर शिखर थापा को एके-47 से भून दिया।दिल्ली के द्वारका में एक कार वाले के सामने से दो लोग नहीं हटे तो कार...

  • अमरनाथ हमला: तू इधर-उधर की बात न कर

    जब से आसमान में मंडराने वाले गिद्धों की संख्या कम हुई है, उसकी जगह आदमी मंडराने लगा है। आदमी गिद्ध बन गया है। मीडिया और सोशल मीडिया के आसमान में भी गिद्ध मंडरा रहे हैं। इन्हीं में से कुछ शाम को चैनलों के स्टुडियो मंडराएंगे। जब वे अमरनाथ यात्रियों की हत्या की बातें कर रहे होंगे तो उनकी ज़बान और लार...

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