महिला किसानों ने सीखा खेती का हुनर, सब्जियों की खेती से कुछ महीनों में हजारों की आमदनी

महिला किसानों ने सीखा खेती का हुनर, सब्जियों की खेती से कुछ महीनों में हजारों की आमदनी

सिल्ली (रांची)। छोटी जोत के किसान अपनी कम जमीन में कैसे बेहतर उपज लें इसके लिए कृषक मित्र की महिलाएं किसानों को प्रशिक्षित कर रही हैं।

ट्रेनिंग के बाद अब ये बाजार से कीटनाशक दवाइयां और खाद बाजार से नहीं खरीदती बल्कि घर पर ही बनाती हैं। सखी मंडल से जुड़ी महिलाएं अब घर पर ही बीजोपचार, खाद बनाना, नाडेप पिट घर पर ही बनाती हैं। ये टपक सिंचाई और श्रीविधि से खेती कर अच्छी उपज ले रही हैं। सुलोचना देवी ने पिछले साल अपनी 20 डिसमिल जमीन में बैंगन, टमाटर, मूली की उपज की खेती की थी, जिसमें इन्हें 40,000 का मुनाफा हुआ था।

लक्ष्मी देवी, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

लक्ष्मी देवी, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

रांची जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर सिल्ली ब्लॉक में गोडाडीह गाँव की सुलोचना देवी (30 वर्ष) सरस्वती शक्ति महिला संगठन की सदस्य हैं। ये अपनी 35 डिसमिल जमीन में खेती करके अपनी आजीविका बढ़ा रहीं हैं। ये बताती हैं, "मैं पिछले 12 वर्षों से खेती कर रही हूं, लेकिन बहुत ज्यादा उपज कभी नहीं होती थी। लेकिन पिछले साल 20 डिसमिल जमीन में मैंने सब्जियां उगाई थीं जिसमें 40,000 का मुनाफा हुआ था।" इस साल सुलोचना देवी अपने पूरे 35 डिसमिल जमीन में सब्जियां उगा रहीं हैं।

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सुलोचना देवी ने समूह से जुड़ने के बाद 5000 का लोन लिया और खेती करनी की शुरुआत की। इन्हें झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की तरफ से केचुआ खाद बनाने के लिए नाडेप पिट और नर्सरी तैयार करने के लिए पॉली हाउस मिला।

सुलोचना बताती हैं, "पहली साल इतना फायदा हुआ तो इस साल अपनी पूरी खेती में टमाटर, मिर्च मूली लगाई है। गाँव की आजीविका कृषक मित्र दीदी ने जो बातें बताई हैं उसका ध्यान रखकर खेती करते हैं। जैविक खाद और जैविक दवाई को खुद बनाकर सब्जियों में छिड़काव किया तो उसमें कोई कीड़ा नहीं लगा और उपज भी अच्छी हुई।"

(ये खबर झारखंड के रांची जिले की कम्यूनिटी जर्नलिस्ट लक्ष्मी देवी ने भेजी है)


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