बारहवीं की पढ़ाई के साथ कर रहे बकरी पालन व्यवसाय, सालाना कमा रहे लाखों

गाँव कनेक्शन और हेस्टर के साझा प्रयास में हम हर महीने आपको ऐसे पशुपालकों को रु-ब-रु कराते हैं जिन्होंने उचित प्रंबधन और सही देखभाल से पशुपालन को मुनाफे का सौदा तो बनाया ही है, साथ ही वे हज़ारों के पशुपालकों के लिए एक अच्छा उदाहरण भी बने हैं।

Diti BajpaiDiti Bajpai   31 Dec 2018 7:55 AM GMT

बारहवीं की पढ़ाई के साथ कर रहे बकरी पालन व्यवसाय, सालाना कमा रहे लाखों

आजमगढ़। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षित युवाओं में पशुपालन के प्रति रुझान काफी बढ़ा है। अठारह वर्षीय अब्दुल्ला खान 12वीं की पढ़ाई के साथ वैज्ञनिक तरीके से बकरी पालन कर रहे हैं और उससे अपने पूरा परिवार का खर्चा भी चलाते हैं।

आजमगढ़ जिले के फखरुद्दीनपुर गाँव में अब्दुल्ला का आधा बीघा में फार्म बना हुआ है। इस फार्म में जमनापारी और बरबरी नस्ल की 36 बकरियां है। अब्दुल्ला अपने फार्म के बारे में गाँव कनेक्शन से बताते हैं, "दो वर्ष पहले हमारे पास 6 बकरियां थी, अब 36 हो गई है। इनके सही रख-रखाव के लिए हमने अलग-अलग कमरे भी बनवाए हैं, जिससे अलग-अलग बकरियों को रखा जा सके।''


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कम लागत, साधारण आवास और सामान्य रख-रखाव में बकरी पालन व्यवसाय गरीब किसानों और खेतिहर मजदूरों के आय का एक अच्छा साधन बनता जा रहा है। इस व्यवसाय से देश के 5.5 मिलियन लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। हर छह साल में देश में होने वाली (जो 2012 में हुई ) पशुगणना (इसे 19वीं पशुगणना कहते हैं) के मुताबिक, पूरे भारत में बकरियों की कुल संख्या 135.17 मिलियन है।

अपने बकरे-बकरियों को स्वस्थ रखने के लिए अब्दुल्ला समय पर टीकाकरण और डीवार्मिंग कराते हैं, जिससे उनको बीमारियां न हो। ''रोजाना बाड़े की साफ-सफाई करते हैं, जितना बाड़ा साफ होगा, बकरियों को बीमारी नहीं होगी।'' अब्दुल्ला ने आगे बताया, ''अभी सर्दियां हैं तो उनके खान-पान और रख-रखाव पर काफी ध्यान दे रहे हैं। सुबह शाम संतुलित आहार देते हैं और ताजा पानी भी पिलाते हैं।''

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फार्म में ही खरीद कर ले जाते हैं बकरियां

उचित प्रंबधन करके अब्दुल्ला बकरी पालन व्यवसाय से सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं। अब्दुल्ला को बकरियों को बेचने के लिए इधर-उधर भटकना भी नहीं पड़ता है। व्यापारी खुद अब्दुल्ला के फार्म में बकरे को खरीदने के लिए आते हैं। ''बकरियों को बेचने के लिए बाजार जाने की भी जरूरत नहीं होती है। फार्म में ही लोग खरीद कर ले जाते हैं।'' इस व्यवसाय को अब्दुल्ला और आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि इससे उनकी कमाई और बढ़ सके।


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