पशु चौपाल: पशुओें को स्वस्थ रखने के लिए हर तीन महीने में दे पेट के कीड़े की दवा

Diti BajpaiDiti Bajpai   18 Jan 2019 9:40 AM GMT

पशु चौपाल: पशुओें को स्वस्थ रखने के लिए हर तीन महीने में दे पेट के कीड़े की दवा

आज़मगढ़। ''अक्सर जानवर चरने के लिए जाते है तो उनके शरीर में बाहरी परजीवी चिपक जाते है जिससे पशुओं को तनाव होता साथ ही उनका दूध उत्पादन भी घट जाता है। बाहरी परजीवी के साथ पशुओं के अंदर भी कीड़े होते है यानी जो पशु खाता है उसका आधा हिस्सा पेट के कीड़ खा जाते हैं इसलिए हर तीन महीने पर पशुओं को पेट के कीड़े की दवा जरूर दे।'' ऐसा बताते हैं, पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ जगदीश मौर्या।

छोटे पशुपालकों को जागरूक करने के लिए हेस्टर बायोसाइंसेज लिमिटेड और गाँव कनेक्शन फाउंडेशन द्वारा छोटे पशुपालकों को जागरूक करने के लिए आज़मगढ़ जिले के पलनी ब्लॉकके कोटवा गाँव में पशु चौपाल का आयोजन किया गया। यह चौपाल उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में चलाई जा रही है।

इस चौपाल में पशुचिकित्सकों, वैज्ञानिकों और हेस्टर कंपनी के सहयोगी द्वारा पशुपालकों को छोटे-छोटे तरीके बताए जा रहे हैं जिसकी मदद से पशुपालक खुद अपने स्तर से पशुओं की देखभाल करके उन्हें संक्रामक बीमारियों से बचा सकता है और मुनाफा कमा सकते है।


आज़मगढ़ में कृषि विज्ञान केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आर पी सिंह ने पशुपालकों को जानकारी देते हुए बताया, नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और उनकी आय को दोगुना के लिए सरकार ने पूरे प्रदेश 650 केवीके स्थापित किए है। इन केंद्रों में फसलों की नई प्रजातियों का प्रदर्शन भी किया जाता है।''

पशु चौपाल: पशुओं की अच्छी सेहत के लिए उन्हें दें संतुलित आहार


अपनी बात को जारी रखते हुए डॉ सिंह बताते हैं, ''ज्यादातर किसान जो अपनी धान या गेंहूं की फसल कम्बाइन से कटवाते हैं, वो उसके अवशेष को खेत में ही जला देते हैं, जो गैरकानूनी है साथ उससे वातावरण प्रदूषित होता है ऐसे में केंद्र में मशीनों की जानकारी दी जाती है ताकि बिना जुताई के बुवाई की गई है।''

कोटवा गाँव के केवीके में आयोजित पशु चौपाल में 50 से ज्यादा पशुपालकों ने भाग लिया। गाय, भैंस और बकरियों में होने वाली संक्रामक बीमारियां (गलाघोटू, खुरपका-मुंहपका, पीपीआर) के लक्षण और उनके टीकाकरण की जानकारी दी गई। टीकाकरण के बारे में जानकारी देते हुए पशुचिकित्सक जगदीश मौर्या ने बताया, ''गाय-भैंस और बकरियों को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए प्रदेश सरकार साल में दो बार निशुल्क टीकाकरण कराती है। यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशुओं में बहुत जल्दी फैलती है।''


छोटे पशुपालकों की आमदनी को बढ़ाने के लिए, उन्नत तरीके से पशुपालन और पशुपालकों को जागरुक करने के लिए हेस्टर बायोसाइंसेज ने एक समर्पित विभाग 'वेटनरी सोशल बिजनेस' बनाया है जो उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड में छोटे पशुपालकों को जागरूक करने का काम कर रहा है।

पशु चौपाल: पशुओं को खिलाएं संतुलित चारा, बढ़ेगा दूध उत्पादन

''ज्यादातर पशुपालक अपने अंदाज से पशुओं की नांद बनवा देते हैं, नांद गलत बनाने से पशुपालक को एक लीटर दूध का नुकसान होता है। इसलिए हमेशा 27 इंच ऊंचाई की ही नांद बनवानी चाहिए। इससे पशु आराम से चारा खाता है। '' पशु चौपाल में हेस्टर कंपनी के सीनियर सहयोगी लालजी द्विवेदी ने बताया।

अक्सर पशुओं के बाड़े मच्छर मक्खियां होती है जिससे पशुओं के दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। इस समस्या के निजात के लिए लाल जी बताते हैं, ''दो से तीन किलो शरीफे की पत्ती ले लें और इस पत्ती को तीन से चार लीटर पानी में डालें जब एक लीटर पानी बच जाए तो पशु के आस पास इसका छिड़काव कर दें और फिर एक हफ्ते बाद इसका छिड़काव करें 70 से 80 प्रतिशत मच्छर गायब हो जाएंगे।

छुट्टा जानवरों से फसलों को बचाने के लिए भी पशु चौपाल में पशुपालकों को जानकारी दी गई। चौपाल में मौजूद वैज्ञानिक डॉ. ए.के वर्मा बताते हैं, ''छुट्टा जानवरों की संख्या के कम हो इसके लिए सरकार ऐसे सीमन को ला रही है जिससे बछिया ही पैदा होगी। इससे पशुपालकों को काफी लाभ मिलेगा।''


चौपाल में पशुपालकों को आहार प्रंबधन, पशुओं का रख-रखाव के बारे में हेस्टर कंपनी के वेटनरी सेल्स एक्जीक्यूटिव सतेंद्र त्रिपाठी ने जानकारी दी। साथ ही आज़मगढ़ के कोटवा में वैज्ञानिक डॉ ए के पांडेय ने पशुपालकों को गाय का महत्वता के बारे में बताते हैं, ''किसान अभी गाय को सिर्फ दूध के लिए प्रयोग करते है। जब वो दूध देना बंद कर देती है तब उन्हें छोड़ देते है। इन्हीं गायों के दूध, गोबर और गोमूत्र से किसान ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सकते है।''

पशु चौपाल: समय पर कराएं टीकाकरण, तभी बढ़ेगा मुनाफा


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