बाराबंकी के मसौली में लहलहाई शिक्षा की हरियाली

बाराबंकी के विकास खंड मसौली के प्राथमिक विद्यालय का परिसर हरे-भरे पौधों से सजाया गया है, अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन पर रहता है खास जोर

बाराबंकी। स्कूल का साफ-सुथरा परिसर, चारों तरफ फैली हरियाली और अनुशासित बच्चे... विकास खंड मसौली के प्राथमिक विद्यालय की यही पहचान उसे बाकियों से अलग बनाती है। प्रधानाध्यापिका ने प्रधान और विद्यालय प्रबंधन समिति के साथ मिलकर स्कूल की तस्वीर बदल दी है। स्कूल के परिसर को न सिर्फ फूल-पौधों से सजाया गया है बल्कि बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए हैं। स्कूल में कई किस्म के पेड़-पौधे लगाए गए हैं। गांव का सफाईकर्मी रोजाना यहां आता है और पूरे विद्यालय की सफाई करता है। स्कूल के शौचालयों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

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विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सीमा देवी ने बताया, 'अच्छी पढ़ाई के कारण लोग अपने बच्चों का नामांकन यहां कराना चाहते हैं। हम लोग एक-एक बच्चे पर ध्यान देते हैं। जो बच्चा जिस विषय में कमजोर होता है उस पर विशेष जोर दिया जाता है। अनुशासन पर खास जोर दिया जाता है। आज इसी पहचान की बदौलत कई गाँवों के बच्चे स्कूल में पढ़ने आते हैं।'

वह आगे कहती हैं, 'हमारा विद्यालय खूबसूरत परिसर के लिए भी जाना जाता है। प्रधान के सहयोग से स्कूल के मैदान में घास लगाई गई है, जिस पर बच्चे लंच टाइम में जमकर मस्ती करते हैं।' कक्षा चार की छात्रा आंचल ने बताया, 'हमारा स्कूल बहुत सुंदर है। हम लोगों के खेलने के लिए झूले भी लगे हैं। मैडम लोग हम लोगों को अच्छे से पढ़ाती हैं। मुझे पढ़ाई के साथ-साथ दोस्तों के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है।'

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रसोइया करता है पौधों की देखभाल

विद्यालय में लगे पौधों की देखभाल का काम विद्यालय में तैनात रसोइया परमहंस के पास है। परमहंस ने बताया, 'यह विद्यालय हमारा है। यहां हमारे बच्चे पढ़ते हैं। मिड डे मील के बाद मेरे पास जो समय बचता है मैं स्कूल की साफ-सफाई में लगाता हूं। मुझे पेड़-पौधों से काफी लगाव है। मैंने इस विद्यालय में कई तरह के पौधे लगा रखे हैं। इनकी कटाई मैं समय-समय पर करता रहता हूं।'

कुल पंजीकरण: 194 बच्चे
छात्र: 110 छात्र
छात्राएं: 84 छात्राएं


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अब लोग बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते नहीं

एसएमसी अध्यक्ष संतोष कुमार ने बताया, 'मेरे बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। यहां उन्हें पढ़ाई का अच्छा माहौल मिला है। मैं भी विद्यालय की बेहतरी के लिए हर संभव कोशिश करता हूं। हर माह होने वाली मीटिंग में सभी सदस्य जरूर मौजूद रहते हैं। पहले इलाके के कई लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। हम लोगों ने उन्हें समझाया, अब वे लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने लगे हैं।'

ग्राम प्रधान प्रकाशिनी देवी ने बताया, " विद्यालय में कुछ समय पहले तक सिर्फ दो अध्यापक थे। जब कोई शिक्षक अवकाश पर रहता था तो बच्चों को काफी दिक्कत होती थी। जब यह बात मुझे पता चली तो मैं खुद आकर बच्चों को पढ़ाती थी। मुझे पढ़ाने का शौक बचपन से था। विद्यालय में कुछ नए अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर मैं बीएसए से मिली और समस्या से अवगत कराया। अब मेरे विद्यालय में नए अध्यापकों की तैनाती हो गई है।"

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