प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान की कोशिशों से आया बदलाव

प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान की कोशिशों से आया बदलाव

राजगढ़ (प्रतापगढ़)। ये प्राथमिक विद्यालय रोज नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। एक वक्त था जब स्कूल मुख्य सड़क पर होने और चारदिवारी न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को यहां भेजना नहीं चाहते थे। इस समस्या को समझते हुए प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान ने मिलकर सबसे पहले यहां बाउंड्री बनवाई। साथ ही स्कूल में शिक्षा का स्तर सुधारा ताकि लोगों में विश्वास बढ़े और वे अपने बच्चों को पढ़ने भेजें।

प्रतापगढ़ जिले के सदर ब्लॉक के राजगढ़ के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजय दूबे बताते हैं, "हमारी जिम्मेदारी होती है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले। जब मेरी यहां पर नियुक्ति हुई तो स्कूल की स्थिति काफी खराब थी। सड़क किनारे होने की वजह से लोग अपने बच्चों भेजने से कतराते थे, लेकिन अब स्कूल के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ा है।"

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अब बच्चों को महंगे स्कूलों क्यों भेजें...

शहर से नजदीक होने के कारण इलाके के ज्यादातर लोग अपने बच्चों को निजी स्कूल भेजते थे, लेकिन वहां ज्यादा फीस भी लगती और बच्चों को आने-जाने में भी बहुत समय लगता था। अजय दुबे बताते हैं, "हमने स्कूल की अच्छी शिक्षा और अनुशासन की बदौलत यहां की तस्वीर धीरे-धीरे बदली। अभिभावक भी बच्चों के दाखिले के लिए हमारे पास आने लगे और कहने लगे कि अब महंगे स्कूलों में बच्चों को भेजने की कोई जरूरत नहीं।"

ग्राम प्रधान ने दस लाख रुपए से काम करवाया

14वें वित्त से 10 लाख रुपए खर्च कर प्रधान ने न सिर्फ स्कूल संवारा बल्कि बच्चों को हर जरूरी चीजें भी मुहैया कराईं। कमरों में टाइल्स, शौचालय के साथ सबमर्सिबल और शानदार किचेन बनवाया। ग्राम प्रधान अरविंद पाल बताते हैं, "मेरे तो गाँव का स्कूल है । अगर मैं ही ध्यान नहीं दूंगा तो कैसे चलेगा, इसलिए सबसे पहले मैंने स्कूल की बिल्डिंग को बेहतर बनाया। जब से यहां नए अध्यापक आए हैं वे भी स्कूल को अपना समझते हैं और बच्चों पर ज्यादा ध्यान देते हैं।"

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जिले में बेहतरीन स्कूलों में हो रही गिनती

पढ़ाई और बेहतर इंफ्रास्ट्रकर की वजह से इस स्कूल की पहचान जिले के बेहतरीन स्कूलों में होने लगी है। पिछले दिनों मंडलायुक्त आशीष गोयल ने भी इस स्कूल का निरीक्षण किया और यहां की व्यवस्था देखकर अध्यापकों को शाबाशी दी। इस स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। प्रधानाध्यापक के प्रयास से बच्चों की संख्या भी बढ़ी है।


बच्चों ने परिसर को बनाया हरा-भरा

प्रधानाध्यापक पढ़ाई के साथ स्कूल को बेहतर बनाने का पाठ भी पढ़ाते हैं। बच्चों ने स्कूल के परिसर में पेड़-पौधे लगाकर उसे हराभरा बना दिया है। यहां तक की गर्मी की छुट्टियों में भी बच्चे आकर पेड़ पौधों का खयाल रखते हैं।

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प्रोजेक्टर और कम्प्यूटर पर पढ़ाई

विद्यालय में प्रोजक्टर, कम्प्यूटर, इन्वर्टर, साइंस लैब के साथ लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। यहां से बच्चों को किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। बच्चे कैरम, बैडमिंटन और शतरंज जैसे खेल भी खेलते हैं। स्कूल के बच्चे कम्प्यूटर पर पढ़ाई करते हैं।

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