मुसहर बाहुल्य इस गाँव का हर बच्चा जाता है स्कूल

Divendra SinghDivendra Singh   5 Nov 2018 9:30 AM GMT

मुसहर बाहुल्य इस गाँव का हर बच्चा जाता है स्कूल

लोधी (सोनभद्र)। मॉडल स्कूल लोधी की प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में अलग ही पहचान है। प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और एसएमसी सदस्यों की कोशिश ने इस विद्यालय की रंगत ही बदल दी है। विद्यालय के कमरों में टाइल्स, शौचालय के साथ शानदार किचन और डाइनिंग हॉल बना है। इस स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दी जा रही है।

राबर्ट्सगंज ब्लॉक के मुसहर बाहुल्य लोधी ग्राम पंचायत में प्राथमिक विद्यालय की हालत कुछ वर्ष पहले तक काफी बदहाल थी। टूटी दीवारें, इधर-उधर दौड़ते बच्चे यही इस विद्यालय की पहचान थी। लेकिन जब से यहां प्रधानाध्यापक राजेश कुमार सिंह की नियुक्ति हुई। राजेश कुमार सिंह ने आते ही नए प्रयोग करने शुरू कर दिए।


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प्रधानाध्यापक राजेश कुमार सिंह बताते हैं, "आज जो आप विद्यालय में बदलाव देख रहे हैं, इसमें दूसरे अध्यापकों, ग्राम प्रधान व एसएमसी सदस्यों का भी काफी सहयोग मिला है। सबसे पहले मैंने प्रधान से मिलकर गांव में खुली बैठक का आयोजन कराया और विद्यालय की कार्य योजना सौंप दी। प्रधान ने अपनी निधि से विद्यालय की दशा और दिशा बदल दी।"

वो आगे कहते हैं, "हर कमरे में फर्श, दीवारों पर शानदार पोस्टर और हर कमरे में पंखे लगे हैं। हम लोग एक-एक बच्चे पर ध्यान देते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे न रह जाए।"

अभिभावकों ने सहयोग कर बदली व्यवस्था

प्रधानाध्यापक राजेश कुमार सिंह, ग्राम प्रधान शमशेर बहादुर सिंह, सहायक अध्यापिका ममता सिंह और एसएमसी सदस्यों ने आसपास के लोगों के सहयोग से प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर बदल दी। शिक्षा से लेकर बच्चों के रहन सहन और साफ सफाई के बारे में बताने के साथ ही अभिभावकों से मिलकर विद्यालय के लिए सहयोग लिया।

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अभिभावक रमेश कुमार बताते हैं, "मेरे बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं। यहां पर पढ़ाई बहुत अच्छी होती है। अब तो इस स्कूल में अंग्रेजी भी पढ़ाई जाने लगी है। स्कूल के सभी टीचर मन से बच्चों को पढ़ाते हैं। जब कभी प्रधान और शिक्षक किसी बैठक के लिए बुलाते हैं हम लोग पूरा सहयोग करते हैं।"

दूसरे अध्यापकों का भी मिलता है सहयोग

सहायक अध्यापिका ममता सिंह बताती हैं, "सोनभद्र जिला शिक्षा के मामले में काफी पीछे है। हमारी कोशिश है कि हमारा जिला शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे जाए, इसलिए हम लोग शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हैं। हम चाहते हैं कि इस गाँव का एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए। इसके लिए मैं अपने एसएमसी सदस्यों के साथ मिलकर स्कूल जाने वाले हर बच्चे के माता-पिता से हर माह मिलते हैं। उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हैं। उन्हें कोई दिक्कत है तो उस परेशानी का समाधान कराता हैं। अभिभावक हमारी बातों का मानते हैं और अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजते हैं।"



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कॉमन डाइनिंग एरिया जहां कक्षा के हिसाब से बच्चे करते हैं दोपहर का भोजन

विद्यालय परिसर में बच्चों के लिए डाइनिंग हॉल बनाया गया है जहां हर दिन बच्चे अपना मिड-डे-मील करते हैं। पूरे एरिया में टाइल्स के लम्बे टेबल और बैठने के लिए बेंच बनी। इनकी लम्बाई को बच्चों के हिसाब से छोटा रखा है। आस-पास पौधे धूप-बारिश से बचने के लिए तिन का शेड भी लगाया गया है।

लंच ब्रेक होते ही कक्षा एक और दो के बच्चे भोजन के लिए आ जाते हैं। "पहले छोटे बच्चे लाइन लगाकर अपना अपना खाना लेकर, भोजन एरिया में बैठकर खाते हैं तब तक तीसरी, चौथी और पांचवीं के बच्चे अंदर अपनी कक्षाओं में ही होते हैं। जब इनका भोजन समाप्त हो जाता है तब बड़े बच्चे भी आकर खाते हैं," विद्यालय की सहायक अध्यापिका ममता सिंह ने बताया।

ग्राम प्रधान का मिलता है पूरा सहयोग

ग्राम प्रधान शमशेर बहादुर सिंह विद्यालय का पूरा सहयोग करते हैं। वो बताते हैं, "हमारा गाँव मुसहर बाहुल्य है, यहां पर लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं, लेकिन जब से इंग्लिश मीडियम हुआ है लोगों की सोच भी बदल रही है। हम घर-घर जाकर लोगों को समझाते हैं।"

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