मुसहर बस्ती में शिक्षा की अलख जला रहा प्रधान

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद ये मुसहर समुदाय पूरी तरह मुख्य धारा में शामिल नहीं हो पाया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी ये काफी पिछड़े हैं। आज भी ये मुसहर जाति के लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।

मुसहर बस्ती में शिक्षा की अलख जला रहा प्रधान

कुशीनगर। "महेंद्र भाई, बच्चे स्कूल जा रहे हैं न? परसों दोपहर में आपके बच्चे को खेत की तरफ टहलते देखा था। बच्चे को हर हाल में स्कूल भेजा करो। ये बच्चे ही आपको और आपके समाज को मुख्यधारा में लाएंगे, "ये कहना है दुदही विकास खंड के गाँव जंगल शंकरपुर के ग्राम प्रधान इमाम हुसैन का। इमाम हुसैन मुसहर समाज में शिक्षा की अलख जला रहे हैं।

इमाम हुसैन ने बताया, "मेरी ग्राम पंचायत में आठ मजरे आते हैं। इसमें से एक मजरा मुसहर जाति के लोगों का है। वैसे तो मेरा प्रयास रहता है कि सभी मजरों का विकास हो, लेकिन मुसहर टोले पर मेरा ज्यादा ध्यान रहता है। मुसहर जाति के लोग पढ़े-लिखे नहीं होते हैं, इसलिए उन्हें शिक्षा का महत्व नहीं पता होता है। वे अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजते हैं। लेकिन मेरा प्रयास है कि मुसहरों के बच्चे भी पढ़ लिखकर आगे बढ़ें। बिना पढ़ाई के मुसहर समाज सौ साल बाद भी मुख्य धारा में नहीं आ पाएगा।"

मुसहर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश की एक जाति है। ये लोग अनुसूचित जाति के अन्तर्गत आते हैं और बहुत गरीब हैं। इनको 'आर्य' या 'बनबासी' भी कहते हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद ये मुसहर समुदाय पूरी तरह मुख्य धारा में शामिल नहीं हो पाया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी ये काफी पिछड़े हैं। आज भी ये मुसहर जाति के लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं। वहीं गांव जंगल शंकरपुर के प्रधान इमाम हुसैन मुजहर जाति के लोगों के मुख्य धारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं। इमाम के इस प्रयास में एसएमसी सदस्यों की भी भागीदारी रहती है।

युवा अध्यापकों के आने से प्राथमिक विद्यालयों पर बढ़ रहा है लोगों का विश्वास


इमाम ने आगे बताया, "मैं हर दूसरे दिन मुसर टोले में जाता हूं। वहां के लोगों के साथ चौपाल लगाता हूं। उन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली तमाम योजनाओं से अवगत कराता हूं। लेकिन सबसे ज्यादा उन्हें शिक्षा के लिए जागरूक करता हूं। मैं उन्हें ये बताता हूं कि, शिक्षा का कितना महत्व है। बिना पढ़े आपका बच्चा भी आपकी तरह ही रह जाएगा। अगर अपने बच्चों और समाज का उत्थान चाहते हो तो हर बच्चे को स्कूल जरूर भेजें। "

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इमाम के प्रयासों का ही असर है कि आज मुसहर टोले का हर बच्चा स्कूल जाने लगा है। मुसहरों के बच्चे पास के गांव मछरिया बसंत भारती के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं, क्योंकि इनके ग्राम पंचायत का विद्यालय काफी दूर है। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक संतोष कुमार ने बताया, "कुछ वर्ष पहले तक मुसहरों के बच्चे स्कूल नहीं आते थे, लेकिन अब प्रधान के समझाने पर वहां के लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने लगे हैं। आज मुसहरों के करीब 150 बच्चे स्कूल में पंजीकृत हैं और इनकी उपस्थिति भी अच्छी रहती है।"

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मुसहर किशोर प्रसाद ने बताया, "न तो हमारे पास रहने को मकान है और न खेत है। हम लोगों ने बहुत तकलीफ सहा है। मैं नहीं चाहता कि, जिन मुश्किलों को हमने झेला है वे हमारे बच्चे भी झेलें। मैं तो पढ़ा नहीं हूं लेकिन अपने बच्चे को स्कूल जरूर भेजता हूं। मैं चाहता हूं मेरा बच्चा पढ़-लिख कर कुछ बन जाए।"

स्कूल की पढ़ाई-लिखाई और सुविधाओं पर नजर रखते हैं राम चन्द्र चाचा


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