औषधीय पौधों से महकती है स्कूल की बगिया

प्राथमिक विद्यालय सिकरौली में बच्चों को दी जाती है औषधीय पौधों की जानकारी

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   19 Feb 2019 11:02 AM GMT

औषधीय पौधों से महकती है स्कूल की बगिया

बाराबंकी। हर पौधे की पत्तियों, जड़, फूल और छाल में अलग-अलग गुण होते हैं। इसको किस मर्ज में और कैसे उपयोग करना चाहिए बहुत कम लोग जानते हैं। इन्हीं औषधीय पौधों की जानकारी दी जा रही है ब्लॉक रामनगर के प्राथमिक विद्यालय सिकरौली में। पूरे विद्यालय परिसर में औषधीय पौधे लगे हुए हैं। यहां के बच्चों को हर पौधे और इनसे दूर होने वाली बीमारियों की पूरी जानकारी है।

प्राथमिक विद्यालय सिकरौली दूर से देखने में किसी उद्यान सा प्रतीत होता है। विद्यालय परिसर में फूलों, सब्जियों के साथ-साथ कई प्रकार के औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जो विद्यालय की खूबसूरती बढ़ाने के साथ-साथ गांव में बीमार होने वाले लोगों को स्वस्थ भी करते हैं।

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विद्यालय के प्रधानाध्यापक विवेक मिश्रा बताते हैं, "प्रकृति ने जो चीजें दी हैं उनका संरक्षण करना बहुत ही जरूरी है। पेड़-पौधे प्रकृति का अभिन्न अंग है। हमारे आस-पास बहुत से ऐसे पौधे होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग उसका लाभ नहीं ले पाते हैं। हमारे विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ कृषि और प्रकृति के बारे में जानकारी दी जाती है।"

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विवेक ने आगे बताया ," गांव के लोग सेहत पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। बीमार होने पर दवाई भी नहीं खरीदते हैं। पहले बच्चे स्कूल से कई दिनों तक अनुपस्थित रहते थे। जब वजह पता की तो पता चला कि बच्चे बीमार होते तो अभिभावकों के पास इतने पैसे नहीं रहते कि वे इलाज करा सकें। इसी समस्या को दूर करने के लिए मैंने अपने विद्यालय में ऐसे औषधीय पौधे लगवाएं हैं जो बुखार, सर्दी, सिर दर्द, पेट दर्द जैसी साधारण बीमारियों में कुछ राहत दे सकते हैं।"


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विद्यालय में लगे औषधीय पौधे

-तुलसी

-सर्पगंधा

-केवकंद

-एलोवेरा

-भांगरा

-नीम

-हरसिंगार


कक्षा पांच में पढ़ने वाले रमन को यह पता है कि पीलिया में कौन सा पौधा काम आता है। विद्यालय का कोई छात्र या ग्रामीण जब पीलिया से ग्रसित होता है तो लोग रमन को याद करते हैं। रमन भांगरा के पौधे से पीलिया की दवाई बनाता है। रमन ने बताया, "मुझे पेड़ पौधों में काफी रुचि है। हम लोगों ने अपने स्कूल में बहुत से पौधे लगा रखे हैं। मेरे सर हर पौधे के बारे में बताते हैं। जब कोई बीमार होता है तो मैं उनकी मदद करता हूं। सर यह सबको बताते हैं कि इसके साथ डॉक्टर को जरूर दिखाएं। हम सबको समझाते भी हैं कि डॉक्टर को दिखाए बिना कोई दवा न लें। इन घरेलू औषधियों से कुछ राहत जरूर मिल जाती है। "

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विद्यालय में है किचन गार्डेन

विद्यालय में एक किचन गार्डेन भी बना हुआ है, जहां विद्यालय के बच्चे सब्जियां उगाते हैं। प्रधानाध्यापक विवेक ने बताया, " हम लोग बच्चों को सब्जी की खेती के बारे में जानकारी देते हैं। बच्चे खुद सब्जी उगाते हैं। इन सब्जियों को उगाने के लिए बच्चे जैविक खाद का प्रयोग करते है। स्कूल से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बनाई जाती है। स्कूल में पैदा होने वाली सब्जियों को बच्चों में बांट दिया जाता है।"

विद्यालय में लगी हैं ये सब्जियां

-चना

-धनिया

- गाजर

-मूली

-मिर्चा

-सरसों

-गोभी

-पालक

-बाकला

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अभिभावक विमलेश कुमारी ने बताया, "हमें बहुत अच्छा लगता है कि हमारे बच्चों की पेड़ पौधों में रुचि है। बच्चे स्कूल से जो सीखते हैं उसके बारे में हमें बताते हैं। पिछले साल मुझे बुखार हो गया था। मेरे बेटे ने कहा, मां तुलसी और अदरक का काढ़ा बनाकर पी लो ठीक हो जाओगी। मुझे उसकी यह बात बहुत अच्छी लगी। "


विद्यालय एक नजर में

पंजीकृत बच्चे---83

छात्राओं की संख्या---42

छात्रों की संख्या---21

अध्यापकों की संख्या--1

शिक्षामित्रों की संख्या--1

बच्चों की उपस्थिति--70 प्रतिशत

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