इस स्कूल में कभी लगती थी सब्जी मंडी, अब बहती है शिक्षा की बयार

प्रधानाध्यापक ने एसएमसी सदस्यों और प्रधान की मदद से स्कूल में लाया बदलाव, पांच किलोमीटर दूर से दूसरे गाँव के बच्चे इस स्कूल में आते हैं पढ़ने

कुशीनगर। दृढ़ इच्छा शक्ति और कुछ कर गुजरने की चाह हो तो कुछ भी हो सकता है। यह बात कुशीनगर के एक प्राथमिक विद्यालय में पूरी तरह से लागू होता है। यहां के एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने शिक्षण में आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके स्कूल की तस्वीर बदल दी। आज यह प्राथमिक विद्यालय जनपद के सबसे अच्छे विद्यालयों में गिना जाता है।

यह प्राथमिक विद्यालय जनपद के विकासखंड फाजिलनगर के गाँव रुदवलिया में स्थित है। यह विद्यालय यहां के प्रधानाध्यापक और यहां के एसएमसी सदस्यों के कारण पूरे जनपद में चर्चित है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील तिवारी ने अपनी मेहनत से कॉन्वेंट स्कूलों की तरह की सुविधाओं का विकास किया है, जिसका परिणाम है कि पांच किलोमीटर दूर से बच्चे इस स्कूल में पढ़ने आते हैं।

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सुनील तिवारी ने बताया, "वर्ष 2010 में जब मैं प्रधानाध्यापक बनकर इस विद्यालय में आया तो उस समय बच्चो की संख्या बहुत कम थी। विद्यालय की स्थिति बहुत दयनीय थी। विद्यालय बाजार से बिल्कुल सटा हुआ है। दोपहर बाद ही स्कूल में सब्जी और मछली की दुकानें लग जाती थीं। छोटे-छोटे बच्चों के सामने ही मांस की बिक्री होती थी।

यह बात मुझे बहुत बुरी लगी। मैंने सबसे पहले प्रधान की मदद से विद्यालय की बाउंड्री बनवाई। इसके साथ ही अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा मैंने विद्यालय के सौन्दरीकरण में खर्च किया। साथ ही शिक्षण को आसान बनाने के लिए प्रोजेक्टर और आधुनिक संसाधनों को जुटाया।"

इसके बाद मेरे सामने बच्चों की संख्या को बढ़ाना चुनौती थी। वर्ष 2010 में विद्यालय में कुछ 148 बच्चे पंजीकृत थे। जो बच्चे पंजीकृत थे उनमें से भी ज्यादातर आते नहीं थे। मैंने अपने सहयोगियों और एसएमसी के सदस्यों के साथ मिलकर ग्रामीणों से मिला। उन्हें आश्वासन दिया कि यह विद्यालय आपका विद्यालय है।

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यहां पर पढ़ाई बहुत अच्छी होती है। आप लोग अपने बच्चों को यहां पढ़ने भेजिए हम विश्वास दिलाते हैं कि आपका बच्चा किसी निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे के कमतर नहीं होगा। इसके बाद लोगों ने हम पर विश्वास किया और अपने बच्चों को हमारे विद्यालय में पढ़ने भेजने लगे। आज विद्यालय में 472 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें से 201 छात्र और 271 छात्राएं हैं।


खेल-खेल में होती है पढ़ाई

पढ़ाई को रुचिकर बनाने के लिए इस विद्यालय में खेल-खेल में पढ़ाई होती है। बच्चों को गाने के माध्यम से कविताएं और पहाड़े याद कराए जाते हैं। बच्चे भी इस मस्ती की पाठशाला का आनंद लेते हैं। वहीं इस स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन का भी पाठ पढ़ाया जाता है।

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सहायक अध्यापक वेद प्रकाश त्रिपाठी ने बताया, यह विद्यालय जिले के अच्छे विद्यालयों में गिना जाता है। हम लोगों का प्रयास रहता है कि एक-एक बच्चों पर ध्यान दिया जाए। हर बच्चे को होम वर्क जरूर देते हैं। हम लोग बच्चों के अभिभावकों से बच्चों के बारे में पता करते रहते हैं। जो बच्चा घर पर नहीं पढ़ता है उसे समझाते हैं।"

कक्षा पांचवी के दीपक ने बताया, "मुझे बीस तक पहाड़ा याद है। सर जी रोज हमें गीत के माध्यम से पढ़ाते हैं। इस तरह से पढ़ना मुझे बहुत अच्छा लगता है। मुझे अंग्रेजी के पोयम भी याद हैं।" वहीं पांचवी में पढ़ने वाली दीपा अपना परिचय अंग्रेजी में बताती है। उसे सभी राज्यों और उनकी राजधानी के नाम भी याद हैं।

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विद्यालय में लगे हैं 60 प्रकार के पेड़ पौधे

विद्यालय परिसर को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया है। विद्यालय में करीब 60 प्रकार के पौधे लगे हैं। बच्चे खुद इन पौधों की देखरेख करते हैं। विद्यालय को साफ-सुथरा रखने में सबसे ज्यादा योगदान एमएमसी सदस्यों की होती है। एसएमसी अध्यक्ष लालसा चौहान ने बताया, "इस स्कूल को हम लोग अपने घर जैसा समझते हैं।

हमारे बच्चे यहां पढ़ते हैं, इसलिए हम चाहते हैं कि यहां का माहौल अच्छा रहे। एसएमसी के जितने भी सदस्य हैं सभी बहुत सक्रिय हैं। बच्चों की उपस्थिति सही रहे इसके लिए हम लोग घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करते हैं। जो लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं उन्हें समझाते हैं कि अगर आपका बच्चा पढ़ेगा नहीं तो उसका भविष्य खराब हो जाएगा।"

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अभिभावक संगीता देवी (40वर्ष) ने बताया, "मेरे तीन बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं। यहां पढ़ाई बहुत अच्छी होती है। मेरे दो बच्चे निजी विद्यालय में पढ़ते थे, लेकिन वहां पढ़ाई अच्छी नहीं होती थी इसलिए मैंने उनका नाम यहां लिखवा दिया। वहीं अभिभावक लल्ली देवी ने बताया, "जबसे सुनील मास्टर इस स्कूल में आए हैं पढ़ाई बहुत अच्छी होती है।बच्चों को खाना भी अच्छा मिलता है।"

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