बच्चों में साफ-सफाई के लिए माताओं को करेंगे जागरूक

बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक वर्ष पहले बनाये गये हेल्थ नोडल टीचर इस पर खूब काम कर रहे हैं और बच्चों को इस लायक बना रहे हैं कि वो खुद को कैसे स्वच्छ रखें।

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   1 Oct 2018 10:34 AM GMT

बच्चों में साफ-सफाई के लिए माताओं को करेंगे जागरूक

लखनऊ। "बच्चों के घर के माहौल को बेहतर बनाने के लिए हम एक और स्वच्छता अभियान शुरू करने वाले हैं, जिसमें बच्चों की माताओं को जागरूक किया जाएगा और उन्हें सिखाया जाएगा कि वो अपने बच्चों को कैसे साफ़ सुथरा और सुरक्षित रखें।" यह कहना है हेल्थ नोडल टीचर श्वेता सिंह का।


बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक वर्ष पहले बनाये गये हेल्थ नोडल टीचर इस पर खूब काम कर रहे हैं और बच्चों को इस लायक बना रहे हैं कि वो खुद को कैसे स्वच्छ रखें।

गोरखपुर के खोराबार ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिकटौर विद्यालय की अध्यापिका और हेल्थ नोडल टीचर श्वेता सिंह अपने विद्यालय के बच्चों को खेलकूद के माध्यम से और पिक्चर के द्वारा बच्चों को स्वच्छता के पाठ पढ़ा रही हैं।

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श्वेता बताती हैं, "पहले हमारे विद्यालय में बच्चे ऐसे ही चले आते थे और समय-समय पर काफी बीमार पड़ जाते थे, लेकिन जबसे बच्चों को सफाई के प्रति जानकारी दी जाने लगी हैं, तबसे वो सीख गये हैं कि उन्हें कैसे कपडे पहनकर आना है, कैसे खाने से पहले हाथ धुलना है।"

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (2015-16) के मुताबिक, घरों तक स्वच्छता की पहुंच के संबंध में आंकड़े वर्ष 2005-06 में 29 से बढ़कर वर्ष 2014-15 में 48 फीसदी हुआ है।

श्वेता आगे बताती हैं, "बच्चों को अगर हम ज्यादा स्वच्छता के बारे में ज्यादा जानकारी देने लगेंगे तो उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आएगा, इसलिए हमने बच्चों को खेलकूद के माध्यम से बच्चों को सिखाना किया कि वो खुद को कैसे स्वच्छ रखें। हम बच्चों को हर शनिवार को इन्सेफ्लाइटिस, जो कि एक बहुत बड़ी बीमारी है, उससे दूर रहने के लिए बच्चों को साफ-सफाई रखने के प्रति शपथ दिलवाते हैं।"

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हेल्थ नोडल टीचर श्वेता आगे बताती हैं, " इतना ही नहीं, दोपहर के खाने के समय हम बच्चों के साथ जाते हैं और उन्हें सिखाते हैं कि उन्हें कैसे हाथ धुलना है। इसके बाद हम बच्चों के साथ दोपहर का खाना भी खाते हैं जिससे वो सीख सकें।" श्वेता बताती हैं, बच्चों के नामांकन के समय हम झुग्गी-झोपड़ी में जाते हैं तो उन्हें शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता के लिए भी जागरूक करते हैं। इसका उनके ऊपर काफी असर भी पड़ा है।"

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