जब जलेबी न मिलने की वजह से उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान ने बदला राग

यतीन्द्र की डायरी' गांव कनेक्शन का साप्ताहिक शो है, जिसमें हिंदी के कवि, संपादक और संगीत के जानकार यतीन्द्र मिश्र संगीत से जुड़े क़िस्से बताते हैं। इस बार के एपिसो़ड में यतीन्द्र ने शहनाई के जादूगर बिस्मिल्लाह ख़ान से जुड़ी तीन कहानियां सुनाईं।

भारत रत्न शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान अपने हुनर के जितने पक्के थे, वो उतने ही अच्छे इंसान भी थे। उनसे जो मिलता था उनका कायल हुए बिना रह नहीं पाता था। यतीन्द्र की डायरी में इस बार उस्ताद की ज़िंदगी के तीन ऐसे क़िस्से सुनाए गए हैं, जिससे उनकी शख्सियत का पता चलता है।

यतीन्द्र बताते हैं एक बार उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान को मुंबई रेडियो स्टेशन से रिकॉर्डिंग का बुलावा भेजा गया। स्टेशन डायरेक्टर ने ख़ान साहब से कहा कि वो केदार और बहार ज़रूर बजाएं, उनकी रिकॉर्डिंग होगी। ख़ान साहब ने हामी भर दी। वो वहां पहुंच गए। जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में सारी तैय्यारी हो गई, तो उन्होंने बागेश्वरी और छायानट राग बजाया। स्टेशन डायरेक्टर ने उनकी तारीफ कि पर कहा कि हम चाहते थे कि आप हमारे लिए बहार और केदार बजा देते। ख़ान साहब ने कहा कि मुझे बजाना तो यही था लेकिन जब मैं स्टेशन आया तो मैंने कहा कि मुझे जलेबी और गुलाबजामुन खाने का मन है। पर, मुझे बर्फी खिला दी गई, कहा गया इसी से काम चला लीजिए। इसलिए इस बार आप बहार की वजह छायानट से ही काम चला लीजिए।

इस एपिसोड में बिस्मिल्लाह साहब से जुड़े दो और दिलचस्प क़िस्से सुनाए गए हैं, जिन्हें आप वीडियो में देख सकते हैं।

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