आदेश के बावजूद नहीं बंटा मिड-डे मील

आदेश के बावजूद नहीं बंटा मिड-डे मीलgaonconnection

लखनऊ। प्रदेश के सूखाग्रस्त जिलों के सरकारी स्कूलों में गर्मियों की छुट्टी में मिड-डे मील की व्यवस्था की जानी थी लेकिन न तो शहर और न ही गाँव के अधिकांश स्कूलों में मिड-डे मील पहुंच पा रहा है।

इस योजना के तहत इस बार 20 मई को शासनादेश जारी किया गया था कि गर्मी की छुट्टियों में भी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं तक 21 मई से 30 जून तक एमडीएम पहुंचाया जाए लेकिन वर्तमान समय में स्कूलों में एमडीएम नहीं पहुंच रहा है। शहर और अलग-अलग ब्लॉक में स्थित स्कूल प्रधानाचार्यों, एमडीएम वितरित करने वाली संस्थाओं, खण्ड शिक्षाधिकारी और बच्चों द्वारा इसकी वजह भी अलग-अलग ही बताई जा रही हैं।

कहीं शिक्षक-शिक्षकों का आपसी तालमेल नहीं है और वह छुट्टी में स्कूल आने में रुचि नहीं ले रहे हैं तो कहीं संस्थाएं स्कूलों में खाना पहुंचाने के लिए तैयार नहीं हैं तो कहीं बच्चों की कम हाजिरी इसकी वजह बताई जा रही है। स्कूलों में एमडीएम वितरित करने की वाली सबसे बड़ी संस्था के मुखिया सुनील मेहता कहते हैं, “स्कूलों में बच्चे ही नहीं आ रहे हैं तो एमडीएम किसके लिए भेजा जाए। 

जिस दिन से एमडीएम वितरित किये जाने का आदेश जारी हुआ था मैंने उस दिन और उसके अगले दिन स्कूलों में खाना भिजवाया था लेकिन कुछ स्कूल खुले नहीं थे तो कुछ स्कूलों में बच्चे ही नहीं थे। कई स्कूलों में बच्चों की संख्या बेहद कम थी। इसके चलते सारा खाना वापस आ गया। मेहता ने बताया कि इसके बाद मैंने बीएसए को इस बारे में एक पत्र भी लिखा था लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। जुलाई में एमडीएम फिर से वितरित किया जाएगा, जब स्कूल खुलेंगे।”

राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज की प्रधानाचार्या प्रीता शुक्ला पहले कहती हैं, “स्कूल में पर्याप्त बच्चे ही नहीं आ रहे हैं, दो-चार आ भी जाएं तो केवल उनके लिए एमडीएम क्यों बनवाया जाए।” 

यह पूछने पर कि क्या स्कूल खोला जाता है? तो इस पर वह कहती हैं कि स्कूल का कार्यालय तो खुलता ही है और कभी-कभी मैं भी स्कूल जाती हूं लेकिन एमडीएम वितरित किये जाने के सम्बन्ध में डीआईओएस द्वारा कोई निर्देश जारी नहीं किये गये हैं। 

इसलिए हमने एमडीएम वितरित किये जाने के लिए संस्था को बाध्य नहीं किया। मामले को लेकर एमडीएम निदेशक श्रद्धा मिश्रा और बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। 

ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति दयनीय

ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो काकोरी स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय कठिंगरा के प्रधानाध्यापक शाहिद अली आब्दी कहते हैं,  “स्कूल में बच्चे नहीं आ रहे हैं इसलिए संस्था द्वारा एमडीएम भी वितरित नहीं किया जा रहा है।” जब यह पूछा गया कि स्कूल खोलने कोई जाता भी है तो उन्होंने कहा कि जब मैं स्कूल की क्यारी में पानी लगाने के लिए लखनऊ से काकोरी जा सकता हूं तो एमडीएम वितरित करवाने क्यों नहीं जा सकता। 

मलिहाबाद ब्लॉक के खण्ड शिक्षा अधिकारी गौतम प्रकाश कहते हैं कि यहां के स्कूलों में एमडीएम ग्राम पंचायत के माध्यम से वितरित किया जाता है जो कि फिलहाल नहीं किया जा रहा है। यह पूछने पर कि क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है ? गौतम कहते हैं कि जिम्मेदारी तो है लेकिन इसके लिए किस से जबरदस्ती कर सकते हैं। उन्होंने यह भी माना कि स्कूल पूरी तरह से खोले ही नहीं जा रहे हैं, शिक्षक-शिक्षकाएं जहां अपनी मनमानी कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत भी मनमानी करने पर उतारू है। 

यदि स्कूल खोले जायें तो बच्चे भी आयेंगे। उधर ग्रामीण क्षेत्र काकोरी में स्कूल जाने वाले बच्चों का कुछ और ही कहना है। वह कहते हैं कि हम लोगों को स्कूल जाने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन स्कूल खोले ही नहीं जाते हैं। 

काकोरी स्थित प्राथमिक विद्यालय गोहरामऊ में कक्षा पांच में पढ़ने वाली मनीषा कहती है, “हम कई बार 9 से 11 के बीच स्कूल गये, लेकिन कभी स्कूल खुला नहीं मिला। 

यदि स्कूल में छुट्टी में भी एमडीएम मिलता रहे तो हम लोगों के लिए तो खुशी की बात है लेकिन फिलहाल स्कूल बंद हैं।” .वहीं शहर के कुछ स्कूलों में खाना पहुंचाने वाली संस्था शास्वत सेवा संस्थान के मुखिया महेन्द्र कहते हैं कि भले ही शासनादेश जारी हुआ हो लेकिन किसी ने छुट्टी में एमडीएम पहुंचाने के लिए बाध्य नहीं किया। इसलिए यह लग रहा है कि शिक्षक और बच्चे खुद भी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं।

दूध और फल वितरण योजना भी हुई थी धराशाही

वर्ष 2015 में एमडीएम में सप्ताह में हर बुधवार को प्रति बच्चा 200 ग्राम दूध वितरित किये जाने की योजना बनायी गयी थी। पहले तो संस्थाओं ने कम बजट को लेकर हाथ खड़े कर दिये थे। अक्षयपात्र द्वारा कुछ स्कूलों में दूध वितरण की शुरुआत की गयी थी लेकिन खराब दूध के कारण कई बच्चों के बीमार होने की वजह से इस संस्था ने भी दूध का वितरण बंद कर दिया था।

इस वर्ष 2016 में अप्रैल महीने से एमडीएम में बच्चों को सप्ताह में हर सोमवार को मौसमी फल दिये जाने की योजना लागू किये जाने को लेकर शासनादेश जारी हुआ था लेकिन अब तक इस योजना की शुरुआत नहीं हो सकी है। संस्थाएं जहां कम बजट का रोना रो रही हैं तो वहीं अधिकारी भी इस पर मौन साधे हुए हैं। 

रिपोर्ट - मीनल टिंगल

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