आधे भी नहीं पूरे हुए संसद में किए वादे

आधे भी नहीं पूरे हुए संसद में किए वादेगाँव कनेक्शन

नई दिल्ली। दो वर्षों में संसद में दो तिहाई केन्द्रीय मंत्रालयों द्वारा किए गए वादो में से आधे से अधिक पर काम नहीं हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय ने वर्ष 2014 में किए गए अपने इकलौते वादे को भी पूरा नहीं किया।

आठ मंत्रालयों ने किए गए वादों में से 80 प्रतिशत पर काम नहीं किया, केवल तीन मंत्रालयों ने संसद में किए गए वादों का 75 प्रतिशत पर काम किया।पीएमओ ने वर्ष 2014 में संसद में वादा किया था कि वर्ष 2013-14 के दौरान सभी मंत्रालयों की कार्यप्रगति और मूल्यांकन की रिपोर्ट जारी करेगा। इस रिपोर्ट को निर्धारित समय में पूरा नहीं किया जा सका।

लोकसभा के आंकड़ों के अनुसार संसद सत्र के दौरान सरकार सांसदों के 250 सवालों का जवाब हर रोज देती है। सदन में सवाल के जवाब में मंत्री मुद्दों पर विचार करने, उन पर कार्य करने का भरोसा देते हैं। इन आश्वासनों को संसदीय कार्य मंत्रालय और लोकसभा सचिवालय द्वारा एकत्र करके सरकार के आश्वासनों के लिए बनी संसदीय समिति को भेज दिया जाता है। फिर कमेटी निर्धारित करती है कि संसद में दिए गए इन आश्वासनों को तीन महीनों में पूरा किया जाए। मंत्रालयों के सचिवों से उम्मीद की जाती है कि हर हफ्ते या पंद्रह दिन पर संसद में दिए गए आश्वासनों की समीक्षा करें। 

कानून मंत्रालय वादों में आगे पर पूरा करने में फिसड्डी 

संसद में दिए गए आश्वासनों में से कुल 146 वादे 16वीं लोकसभा में कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा किए गए, इनमें से मात्र 27 प्रतिशत को ही 12 मई, 2016 तक पूरी की गईं। 

लोकसभा भंग हो जाती है, तो संसद में दिए गए आश्वासन अगली सरकार को बढ़ा दिए जाते हैँ। संसद में सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय, अल्पसंख्यक मामले, एवं सड़क परिवहन एवं हाइवे मंत्रालय के क्रमश: 83%, 82% व 75% वादे अभी भी लंबित हैं।

गृह मंत्रालय द्वारा के संसद में किए गए 58 प्रतिशत वादे नहीं पूरे हुए। एक जो गृह मंत्रालय द्वारा आश्वासन को छोड़ दिया गया वह था तटीय पुलिस स्टेशन की स्थापना। 26/11 हमलों के बाद इनकी स्थापना की बात उठी थी, नवंबर, 2015 में मंत्रालय ने इस आश्वासन को खत्म करने के लिए आग्रह किया। 

रिपोर्टर - अक्षय अग्रवाल/प्रतीक सिब्बल

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