आधुनिक तकनीक: कम जगह में खेती से ज़्यादा मुनाफा

आधुनिक तकनीक: कम जगह में खेती से ज़्यादा मुनाफाgaoconnection

लखनऊ। परंपरागत खेती के साथ किसान कम समय में मुनाफा कमाने के लिए सब्जियों की खेती की तरफ रूख कर रहे हैं। कम जगह और कम लागत में आधुनिक विधि अपनाकर भी किसान सब्जियों की खेती कर सकते हैं।  

खेत तैयार करना

सबसे पहले 30-40 सेंटीमीटर की गहराई तक कुदाली या हल की सहायता से जुताई करें। खेत से पत्थर, झाड़ियों एवं बेकार के खर-पतवार को हटा दें। खेत में अच्छे ढंग से निर्मित 100 किलोग्राम कृमि खाद चारों ओर फैला दें। आवश्यकता के अनुसार 45 सेंटीमीटर या 60 सेंमी की दूरी पर मेड़ या क्यारी बनाएं।

 बीज की बुआई, पौधरोपण

सीधे बुआई की जाने वाली सब्जी जैसे भिंडी, बीन एवं लोबिया आदि की बुआई मेड़ या क्यारी बनाकर की जा सकती है। दो पौधे 30 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाई जानी चाहिए। प्याज, पुदीना एवं धनिया को खेत के मेड़ पर उगाया जा सकता है। प्रतिरोपित फसल, जैसे - टमाटर, बैंगन और मिर्ची आदि को एक महीना पूर्व में नर्सरी बेड या मटके में उगाया जा सकता है। बुआई के बाद मिट्टी से ढककर उसके ऊपर 250 ग्राम नीम के फली का पाउडर बनाकर छिड़काव किया जाता है ताकि इसे चीटियों से बचाया जा सके।

टमाटर के लिए 30 दिनों की बुआई के बाद और बैंगन, मिर्ची, बड़ी प्याज के लिए 40-45 दिनों के बाद पौधे को नर्सरी से निकाल दिया जाता है। टमाटर, बैगन और मिर्ची को 30-45 सेंमी की दूरी पर मेड़ या उससे सटाकर रोपाई की जाती है। बड़ी प्याज के लिए मेड़ के दोनों ओर 10 सेंटीमीटर की जगह छोड़ी जाती है। रोपण के तीसरे दिन पौधों की सिंचाई की जाती है। बगीचा के एक छोर पर बारहमासी पौधों को उगाएं। इससे इनकी छाया अन्य फसलों पर न पड़े तथा अन्य साग-सब्जी फसलों को पोषण दे सकें। बगीचा के चारों ओर तथा आने-जाने के रास्ते का उपयोग विभिन्न अल्पाविध हरी साग-सब्जी जैसे- धनिया, पालक, मेथी, पुदीना आदि उगाने के लिए किया जा सकता है।

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