अब इन्हें किसी मैकेनिक की नहीं पड़ती जरूरत, ग्रामीण महिलाएं मैकेनिक बन मिनटों में ठीक करती हैं हैंडपम्प

सखी मंडल की महिलाएं शौचालय निर्माण से लेकर नल मैकेनिक बनाने तक का हुनर जानती हैं। जिन हाथों में कभी बेलन और कंछुल था आज उन्हीं हाथों में औजार पकड़कर ये महिलाएं विकास की कहानी गढ़ रही हैं।

अब इन्हें किसी मैकेनिक की नहीं पड़ती जरूरत, ग्रामीण महिलाएं मैकेनिक बन मिनटों में ठीक करती हैं हैंडपम्प

नेहा कुमारी, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

लातेहार। सखी मंडल की महिलाएं रानी मिस्त्री की ट्रेनिंग के बाद अब चापाकल (नल) मैकेनिक बन गयी हैं। ये शौचालय निर्माण से लेकर नल मैकेनिक बनाने का हुनर जानती हैं। जिन हाथों में कभी बेलन और कंछुल था आज उन्हीं हाथों में औजार पकड़कर ये महिलाएं विकास की कहानी गढ़ रही हैं।

लातेहार जिला की सामुदायिक पत्रकार नेहा कुमारी.

लातेहार जिला के बरवाडीह प्रखंड के पांच गांव से सखी मंडल की दो-दो दीदी को बुलाया गया जिसमें कुछ दीदी को शौचालय निर्माण की ट्रेनिंग दी गयी और कुछ दीदी को चापानल बनाने की ट्रेनिंग दी गयी। अब ये रानी मिस्त्री अपने आसपास गांव का नील ठीक करने जाती हैं, जो पैसा इन्हें मिलता है उससे इन्हें आमदनी का एक जरिया मिला है। गांव के जो नल पहले महीनों खराब रहते थे और मिस्त्री नहीं मिलता था, आज वही नल ये महिलाएं खोलकर ठीक कर देती हैं।

इन दीदियों का कहना है कि ट्रेनिंग लेकर एक हुनर अपने पास आ गया है। पैसे की आमदनी के साथ-साथ अब अपने मोहल्ले का नल ठीक करने के लिए महीनों मिस्त्री का इंतजार नहीं करना पड़ता है, ये अब तुरंत अपना नल ठीक कर लेती हैं।

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