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इरीगेशन से अब झारखंड में होगी सालभर खेती, महिलाएं आसानी से कर सकेंगी सिंचाई

Neetu SinghNeetu Singh   1 July 2019 11:58 AM GMT

इरीगेशन से अब झारखंड में होगी सालभर खेती, महिलाएं आसानी से कर सकेंगी सिंचाई

रांची (झारखंड)। झारखंड में राज्य का 1.8 मिलियन हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है जो यहां के भौगोलिक क्षेत्रफल का 22 प्रतिशत है। परांपरिक तौर पर यहां के किसान वर्षा पर आधारित खेती करते हैं। यहाँ सैकड़ों एकड़ खाली पड़ी जमीन ये बताने के लिए काफी हैं कि यहां सालभर में सिर्फ धान की ही खेती हो पाती है।

भरी दोपहरी में खेत में चल रहे पानी की तरफ इशारा करते हुए बंसती देवी (32 वर्ष) कहती हैं कि "हमारी इतनी उमर बीत गयी लेकिन हम अपने खेत में साल में एक से दूसरी फसल न लगा पाए। अपने खेत में कभी दूसरी फसल लगा पाएंगे इसकी उम्मीद हमने और यहाँ के लोगों ने छोड़ दी थी।" वो मुस्कुराते हुए बोलीं, "लेकिन इस जोहार ने खत्म हो चुकी उम्मीद को पूरा कर दिया। हमारे उत्पादक समूह को सोलर से चलने वाला ये पम्पिंग सेट मिला है। अब उत्पादक समूह की दीदी साल में दो तीन फसल ले पाएंगी।" बंसती देवी हजारीबाग जिला मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर दूर चुरचू प्रखंड के सरवाहा गांव की रहने वाली हैं।



बसंती देवी झारखंड की पहली महिला नहीं हैं जो साल में एक फसल लगाने से चिंतित हों बल्कि यहाँ की लाखों महिलाएं इस समस्या से परेशान हैं। यहाँ केवल 14 प्रतिशत जमीन ही सिंचित है। जिसकी वजह से यहाँ के किसान केवल बरसात में धान की ही खेती कर पाते थे। पानी के साधन न होने की वजह से अक्सर धान की खेती के बाद यहां के लोग पलायन कर जाते हैं।

पानी के संसाधन न होना यहाँ के किसानों के लिए हमेशा से चिंता का विषय रहा है। बारिश का पानी संचित नहीं किया जाता और सिंचाई की कोई मूल-भूत सुविधा नहीं होने की वज़ह से किसानों के खेत खाली पड़े रहते। ऐसी परिस्थिति में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी ने जोहार परियोजना के अंतर्गत झारखंड के विभिन्न जिलों में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लघु-स्तरीय सिचांई योजना के तहत कार्य करना शुरू किया है।

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जोहार परियोजना ने इन महिलाओं में उम्मीद की एक किरण जगाई है। इस परियोजना के अंतर्गत हर एक उत्पादक समूह को लघु स्तरीय सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लघु स्तरीय सिंचाई के संसाधनों पर महिलाओं का नियंत्रण होगा। जरूरत के अनुसार ये अपने खेतों में सिंचाई कर सकेंगी। सिंचाई के इन संसाधनों पर उत्पादक समूह की महिलाओं का मालिकाना हक रहेगा। 17 जिले के 39 प्रखंड में दो हजार लघु सिंचाई की व्यवस्था की गयी है। जिससे 18,000 हेक्टेयर जमीन को सिंचित करना सुनिश्चित किया गया है। जिसकी पूरी बागडोर महिलाओं के हाथों में होगी।

झारखंड में जोहार के द्वारा लगने वाले लघु-स्तरीय सिंचाई के संसाधनों से यहाँ के किसानों का बहुस्तरीय-स्तर पर जीवन बदलेगा। एक इरीगेशन से 15 से 20 किसान लाभान्वित होंगे। जिन खेतों में सिर्फ बारिश के दिनों में धान उगाया जाता था अब उन खेतों में किसान साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे। जिससे उत्पादक समूह से जुड़ी महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी और उनकी आजीविका सशक्त होगी।





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इरीगेशन लगाने की ये है पूरी प्रक्रिया...

इस लघु-स्तरीय सिंचाई योजना का लाभ जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए उत्पादक समूह में जुड़े आजीविका कृषक मित्र और सीनियर आजीविका कृषक मित्र की भूमिका अहम होती है। कृषक मित्र सर्वे के बाद उत्पादक समूह की महिलाओं की सहमती लेते हैं कि किस जमीन पर इरीगेशन लगाना है।

सर्वे के बाद इन महिला किसानों का सबसे पहला काम पैच सेलेक्ट करना होता है। पैच सेलेक्शन का अर्थ है ऐसे जगह का चुनाव करना जहां पर प्राकृतिक-तौर पर पानी की उपलब्धता हो और वहां से आसानी से सबके खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। इस तरह से ये महिला किसान अपने खेतों में कम से कम तीन पैच सेलेक्ट करती हैं। दूसरी प्रक्रिया है इंजीनियर द्वारा निर्धारित पैच की जांच करना। महिला किसानों द्वारा सेलेक्ट किये गये सभी पैचों को इंजीनियर टेक्नि‍कल-तौर पर जांच करता है और उसे जो पैच सबसे उचित लगता है वहां कुएं के निर्माण के लिए निशान लगवाता है।



इंजीनियर द्वारा फाइनल पैच निर्धारित करने के बाद उस जगह का सर्वे किया जाता है। इस सर्वे में जमीन की स्थिति, ऊंचाई और कुंआं निर्माण से लेकर खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पानी लाइन की पूरी विस्तृत रिर्पोट तैयार की जाती है। इस रिपोर्ट को उत्पादक समूह की सभी महिलाओं के सामने पढ़ा जाता है। सबकी सहमती के बाद काम आगे बढ़ता है। इरीगेशन लगवाने की पूरी जिम्मेदारी उत्पादक समूह की होती है। जोहार के तरफ से इंजीनियरिंग मदद दी जाती है। इरीगेशन लगने के शुरुआती दौर से लेकर उसके समापन तक का भुगतान उत्पादक समूह द्वारा ही किया जाता है।

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जोहार के अंतर्गत छोटे और सीमांत किसानों का भी ध्यान रखा जाता है जिन किसानों की जमीन लघु सिंचाई के क्षेत्र में नहीं आती है और वो खेती करते हैं। ऐसे किसानों को साइकिल संचालित सोलर पम्पिंग सेट दिया जा रहा है। ये सेट उत्पादक समूह में ही रहता है जिसे कोई भी किराए पर लेकर सिंचाई कर सकता है। उत्पादक समूह की महिलाएं इरीगेशन लगाने में श्रमदान भी करती हैं। महिलाओं की एक जल प्रयोक्ता समिति भी बनाई गयी है जो पम्पिंग सेट चलाने की पूरी जिम्मेदारी रखती हैं।



जोहार परियोजना में चार तरह से सिंचाई की सुविधाएँ दी जा रही हैं...

1- डीजल आधारित सिंचाई।

2- बिजली आधारित सिंचाई।

3- सोलर संचालित सिंचाई।

4- गुरुत्वाकर्षण सिंचाई।


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