सखी मंडल से जुड़कर महिलाओं को मिल रहा कृषि योजनाओं का सीधा लाभ

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आजीविका मिशन के तहत राज्य में सखी मंडल से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को सरकार की योजनाओं का सीधे लाभ मिल रहा है।

Neetu SinghNeetu Singh   29 Jun 2018 7:36 AM GMT

सखी मंडल से जुड़कर महिलाओं को मिल रहा कृषि योजनाओं का सीधा लाभ

रांची (झारखंड)। सखी मंडल से जुड़ी सरस्वती देवी को जब महिला स्वावलंबन योजना के तहत मुख्यमंत्री ने उन्नत नस्ल की पांच बकरियां कृषि चौपाल में दी तो इनकी खुशी ठिकाना नहीं रहा। सरस्वती देवी ने खुश होकर कहा, "अगर हम समूह से न जुड़े होते तो आज हमें ये बकरियां नहीं मिलती। समूह में जुड़ने के बाद पैसों को बचत करने की आदत हो गयी और घर बैठे सरकार की योजनाओं की जानकारी भी मिलने लगी।"

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आजीविका मिशन के तहत राज्य में सखी मंडल से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को सरकार की योजनाओं का सीधे लाभ मिल रहा है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के तहत हर गांव में सखी मंडल की महिलाएं हैं। सरकार की जब भी किसी योजना की शुरुआत होती है तो सबसे पहले समूह से जुड़ी जरूरतमंद महिला को इसका लाभ दिया जाता है। राज्य में प्रखंड महोत्सव-सह-कृषि चौपाल का आयोजन हर प्रखंड में तीन दिवसीय 20 जून से 29 जून तक चलाया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ किसानों तक उनके ही गांव में चौपाल लगाकर किया गया।


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कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के प्रखंड स्तरीय कृषि चौपाल की शुरुआत मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रांची जिले के कांके प्रखंड के गागी गांव से की। यहां किसानों को और सखी मंडल से जुड़ी जरूरतमंद महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पशुपालन वितरण, बीज वितरण, पौधा वितरण किया गया। सखी मंडल से जुड़ी चार महिलाओं में से दो को बकरी पालन और दो को चूजा पालन दिया गया।

मुख्यमंत्री रघुवरदास ने कहा, "मैंने गरीबी देखी है, मैं गरीबी की तकलीफ को समझता हूं। आप सभी की गरीबी जल्द से जल्द समाप्त हो ये हमारी कोशिश है। चौपाल का आयोजन गांव में इसलिए किया गया जिससे किसान अपनी समस्या सीधे बता पाएं। जो भी योजना का लाभ दिया जाएगा वो सीधे आपको इस चौपाल में दिया गया जिससे बिचौलियों से आपको मुक्ति मिली।" उन्होंने कहा, "झारखंड को बिचौलिया मुक्त झारखंड बनाना है। राज्य को 400 करोड़ रुपए का दूध बाहर से खरीदना पड़ता है अगर पशुपालन पर किसान ध्यान दें तो ये 400 करोड़ रुपए गांव के विकास में काम आएंगे।"

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सरस्वती देवी (25 वर्ष) रांची जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर कांके प्रखंड के गागी गांव की रहने वाली हैं। इनके पति को दोनों आंखों से दिखाई नहीं पड़ता है, सरस्वती देवी खुद ही खेती करके अपने पति और तीन बच्चों की देखरेख करती हैं। वर्ष 2016 में ये कुसुम महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर हप्ते में 20 रुपए की बचत करने लगीं। सखी मंडल की बहनों ने इन्हें महिला स्वावलंबन योजना के तहत चिन्हित किया। जिससे इन्हें मुख्यमंत्री के द्वारा पांच उन्नत किस्म की बकरियां मिली। जो इनके आजीविका का अब साधन होंगी।

सरस्वती देवी की तरह इस गांव में सखी मंडल से जुड़ी शिवानी देवी, सरिता कुमारी, मालो देवी को बकरी और चूजा देकर लाभान्वित किया गया। सरिता कुमारी (21) वर्ष ने अपने बाएं हाथ को दिखाते हुए कहा, "मेरा ये हाथ पूरी तरह से खराब है, खुद का खर्चा चलाने के लिए कोई रोजगार चाहिए था अगर आज समूह से न जुड़े होते तो हमारी तकलीफ के बारे में अधिकारीयों को नहीं पता चलता और हमे बकरी नहीं मिलती।"

सखी मंडल से जुड़ी महिलाओं का मानना है कि सखी मंडल से जुड़ने की वजह से ही उन्हें सरकार की योजनाओं का सीधे लाभ मिल पा रहा है।

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