झारखंड के दुर्गम गांव की खबरें खुद लिखेंगी सखी मंडल की महिलाएं

Neetu SinghNeetu Singh   20 Nov 2018 1:09 PM GMT

झारखंड के दुर्गम गांव की खबरें खुद लिखेंगी सखी मंडल की महिलाएं

रांची (झारखंड)। "हमारे गाँव में जो अखबार आता है उसमें नेताओं की या मारपीट की ही खबरें होती हैं। पर कभी उसमें हमारे गाँव की खबरें नहीं दिखाई देती। लेकिन अब हम खुद पत्रकार बनकर अपने गाँव की खबरें लिखेंगे।" ये बात चार दिवसीय सामुदायिक पत्रकार प्रशिक्षण में वीना देवी (40 वर्ष) ने आत्मविश्वास के साथ कही।

वीना देवी रांची जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर सिल्ली ब्लॉक के पतराहातू गाँव की रहने वाली हैं। ये झारखंड महिला समिति पतराहातू की अध्यक्ष हैं। इन्होंने अपने समूह की अनगिनत कहानियों का जिक्र करते हुए कहा, "हमारे समूह की सभी दीदियाँ कुछ न कुछ रोजगार कर रहीं हैं। कोई पशु सखी है तो कोई आजीविका कृषक मित्र। इनमें से कोई अपनी दुकान चला रहा है तो कोई बाजार में सब्जी बेचकर अपने परिवार का खर्चा चला रहा है।"

रांची के राज रेजीडेंसी होटल में चल रहे चार दिवसीय सामुदायिक पत्रकार प्रशिक्षण के दूसरे दिन वीना देवी ने कहा, "हम अपने समूह और आसपास के समूह की बहुत सी कहानियाँ लिखेंगे। ये कहानियां दूसरी महिलाओं को सीख देंगी। गरीबी से बाहर निकलकर ये महिलाएं अब रोजगार करके अपने परिवार की जिन्दगी बदल रही हैं।"

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इस चार दिवसीय 19-22 नवंबर 2018 की कार्यशाला का आयोजन झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी और गांव कनेक्शन फाउंडेशन के साझा प्रयास से किया गया है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली सक्रिय महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें सामुदायिक पत्रकार बनाकर अपने गाँव की आवाज़ बनाना है। ये महिलाएं सखी मंडल से जुड़ी उन महिलाओं की कहानियाँ लिखेंगे जो अभी तक सुर्खियाँ नहीं बनी हैं।

सामुदायिक पत्रकार बनने की बारीकियां बता रहे गांव कनेक्शन से अरविंद शुक्ला

सामुदायिक पत्रकारिता के इस प्रशिक्षण में वीना देवी की तरह सखी मंडल से जुड़ी 26 महिलाएं शामिल रहीं। ये महिलाएं झारखंड के पलामू, सिमडेगा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, रांची के दुर्गम इलाकों से आयी हैं। इन क्षेत्रों में या तो पत्रकार पहुंच नहीं पाते अगर पहुंचते भी हैं तो तब जब कोई नेता आते हैं। इसलिए गाँव की समस्याएं और सखी मंडल से जुड़ी कहानियाँ अखवारों में कभी-कभार ही दिखाई देती हैं।

इस कार्यशाला में रांची से लगभग 300 किलोमीटर दूर पलामू जिला से आयी सीमा देवी (28 वर्ष) ने बताया, "दो दिन में समूह की दूसरी दीदियों की कहानी सुनकर उल्लास जगा है। हमारे आसपास समूह में भी बहुत कहानियाँ हैं। अब लिखना सीखकर उन कहानियों को लिखेंगे जो दूसरी महिलाओं से कुछ अलग काम कर रही हैं।"

वहीं पूर्वी सिंहभूम जिले से आयी शिखा रानी गोप (32 वर्ष) को शिशु पालना गृह में पढ़ाने से लेकर प्रौढ़ शिक्षा में पढ़ाने का अच्छा अनुभव है। वो बताती हैं, "हमारे पास तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की तमाम कहानियाँ हैं। हमें बहुत खुशी हो रही है कि अब वो सारी कहानियाँ हम सामुदायिक पत्रकार बनकर लिख पायेंगे।"


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इन महिलाओं को सामुदायिक पत्रकारिता के फायदे गिनाते हुए गाँव कनेक्शन के डिप्टी न्यूज एडिटर अरविन्द शुक्ला ने कहा, "आप उन दुर्गम इलाकों से हो जहाँ अभी भी सक्रिय मीडिया नहीं पहुंच पाती हैं। उन क्षेत्रों की खबरें आप लिखकर उन्हें मुख्यधारा में ला सकती हैं।" इससे न सिर्फ आपको पहचान मिलेगी बल्कि आपके रोजगार का एक माध्यम बन सकता है।"

वहीं जेएसएलपीएस के नालेज मैनेजमेंट एंड कम्युनिकेशन सेल की यंग प्रोफेशनल अंकिता टोपो ने कहा, "इन ग्रामीण महिलाओं को लिखने के साथ-साथ मोबाइल से फोटो खींचने का भी तरीका बताया गया। कार्यशाला के तीसरे दिन इन महिलाओं को रांची से लगभग 60 किलोमीटर दूर सिल्ली ब्लॉक में फील्ड विजिट पर ले जायेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "फील्ड में ये महिलाएं फोटो और वीडियो बनाना सीखेंगी जिससे ये खबर के साथ-साथ फोटो भी भेज सकें। ये फील्ड में दूसरे समूह की सकारात्मक कहानियाँ भी खोजेंगी।"

ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित करतीं गांव कनेक्शन की संवाददात नीतू सिंह

गरीबी की वजह से 17 वर्ष में शादी हो चुकी पूर्वी सिंहभूम जिले की रेणुवाला भगत (21 वर्ष) ने उत्साहित होकर कहा, "पढ़ना चाहते थे कुछ करना चाहते थे पर गरीबी की वजह से माँ-बाप ने जल्दी शादी कर दी। शादी के एक साल बाद बच्चा हो गया। इसलिए कुछ कर नहीं पाए। पर आज हम बहुत खुश हैं कि हमें सामुदायिक पत्रकार बनने की ट्रेनिंग मिल रही है। अब हम अपने मन का काम कर पाएंगे।"

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सामुदायिक पत्रकारिता प्रशिक्षण के दूसरे दिन सखी मंडल की इन महिलाओं में खासा उत्साह दिखा। इन्होंने अपने समूह से जुड़ी कई कहानियों को लिखकर दिखाया। इन महिलाओं ने अपने खुद की बहुत सारी वो कहानियाँ साझा की जो सैकड़ों महिलाओं के लिए उदाहारण थीं।


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