आख़िर क्यों नहीं बिक रहे सौर उपकरण

आख़िर क्यों नहीं बिक रहे सौर उपकरण

रायबरेली। संजय चौधरी (35 वर्ष) पिछले वर्ष अपनी खेती के लिए सरकारी सब्सिडी पर सोलर पंप खरीदने का विचार कर रहे थे। उन्होंने ब्लॉक पर अपना आवेदन भी जमा करवा दिया पर कुछ दिनों बाद उन्हें जब पता चला कि उन्हें पंप की पूरी कीमत पहले अदा करनी पड़ेगी, फिर चार महीने बाद उन्हें सब्सिडी मिलेगी तो उन्होंने पंप लेने का विचार बदल दिया। 

रायबरेली जिला मुख्यालय से 10 किमी. दूर दक्षिण दिशा में सतांव ब्लॉक के बरउवा गाँव में एक एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती कर रहे संजय के गाँव में बिजली दिन में सिर्फ चार घंटे आती है। गाँव के पास से गुज़रने वाली नहर में पानी न आने से संजय खेत की सिंचाई को पूरी तरह से बिजली पर निर्भर हैं। संजय बताते हैं, ''गाँव में बिजली कम रहती है, इसलिए सिंचाई में दिक्कत होती है। धान की फसल ज़्यादा पानी मांगती है, इसलिए हम सोलर पंप खरीदना चाहते थे, पर पंप महंगा होने की वजह से हमें यह विचार बीच में ही रोकना पड़ा।"

बिजली की समस्या से छुटकारा पाने के लिए सौर ऊर्जा अच्छा विकल्प है, पर वर्तमान में सौर उपकरणों लगवाने पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी पाना सबसे बड़ी परेशानी है। इसके विपरीत सौर उपकरणों को निजी डीलर से लगवाना अधिक सस्ता और कारगर साबित हो रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी का कोई फायदा नज़र नहीं आ रहा है।

ग्रामीण स्तर पर करीब आठ हज़ार परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ चुकी निजी कंपनी नेचरटेक इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक श्याम पात्रा बताते हैं, ''हम सरकारी और निजी स्तर पर सीधे उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा उपकरण उपलब्ध करावा रहे हैं, जिनमें एक किलोवाट से लेकर 15 किलोवाट तक के पैनल व दूसरे उपकरण शामिल हैं।"

''निजी उपकरणों में लोन, वारंटी व दूसरी सुविधाएं सरकार से मिलने वाली सुविधाओं के बराबर ही है और झंझट भरी नहीं है। इसलिए लोग निजी तौर इन उपकरणों सीधे डीलरों से लगवाना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।" श्याम आगे बताते हैं।

सरकार की तरफ से निजी व संस्थागत उपयोग के लिए लगवाए जाने वाले सौर ऊर्जा पैनल के लिए 15 फीसदी सब्सिडी मिलती है। इस पर सरकार से पांच साल की वारंटी दी जाती है। 

''सरकार की ओर से लगवाए जाने वाले उपकरण (सोलर पंप, पैनल) पर 15 फीसदी सब्सिडी के साथ पांच साल की वारंटी की सुविधा दी जाती है। उपकरणों की कीमत की बात की जाए तो प्राइवेट उपकरणों की कीमतें हमेशा बाज़ार पर निर्भर रहती हैं, जिनमें उतार-चढ़ाव चलता रहता है।" विवेक भार्गव जोनल इंजीनियर, यूपीनेडा बताते हैं।

दूसरी ओर सरकारी सौर उपकरणों की कम हो रही खरीद का एक कारण इनकी खरीद पर लगने वाला समय है। एक व्यक्ति को सरकार की ओर से सब्सिडी पर कोई भी सौर उपकरण लेने के लिए ब्लॉक पर दो महीने पहले अपना आवेदन जमा करना पड़ता है। इस आवेदन में उसकी बैंक डीटेल के साथ-साथ उसका पता और फोटो लगती है। उपकरण मिलने के तीन से चार महीने के बाद लाभार्थी के खाते में सब्सिडी के पैसे आते हैं। इस प्रक्रिया में बहुत समय लग जाता है, इस वजह से ज़्यादातर लोग निजी तौर पर डीलर से उपकरणों को लगवा लेते हैं। 

सरांय गाँव के लाल वर्मा (41 वर्ष) बताते हैं, ''ब्लॉक की एक सरकारी योजना में हमने पिछले साल 35 हज़ार रुपए देकर घर पर 450 वाट का सोलर पैनल लगवाया था। पैनल पर हमें 15 फीसदी सब्सिडी भी मिलनी थी, जो तीन महीने के भीतर हमारे खाते में आनी निश्चित थी। एक साल बीत गया पर अभी तक सब्सिडी का पैसा नहीं मिला है।"

''अगर आपकी पहुंच सरकारी अफसरों तक अच्छी है, तो आपका पैसा जल्दी मिल सकता है, नहीं तो पैसे मिलने में वर्षों लग जाता है।" लाल वर्मा आगे बताते हैं।

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