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आर-पार की लड़ाई के मूड में दो विभाग

आर-पार की लड़ाई के मूड में दो विभागगाँव कनेक्शन

लखनऊ। ग्राम विकास महापरिषद और ग्राम पंचायत परिषद के बीच की अपने वर्चस्व और अधिकार की लड़ाई अब ग्रामीण विकास के लिए रोड़ा बनती जा रही है। गुरुवार को दोनों पक्षों ने अपना-अपना ज्ञापन प्रभारी जिला अधिकारी (सीडीओ) को सौंपा। 

बीते कई दिनों से इन दोनों विभागों में अपने-अपने वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। ग्राम पंचायत परिषद, लखनऊ के महामंत्री नागेन्द्र कुशवाहा बताते है, “हमें ग्राम विकास विभाग स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दे रहा, इससे गाँव के विकास कार्यों में देरी होती हैं, हमारा मुद्दा उनसे लड़ना नहीं है। हम बस अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है। वहीं दूसरी ओर ग्राम विकास महापरिषद के महामंत्री दीपक चौधरी बताते हैं, “ग्राम पंचायत परिषद ने ग्राम विकास से मुक्ति का झूठा नारा दिया हुआ है। ये ग्राम पंचायत को वर्चस्व दिला के एक तरह से आधारभूत संरचना पर चोट करना चाहते हैं।” ग्राम विकास विभाग ने सीडीओ को आठ सूत्री ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पंचायतीराज विभाग की मांगों को गलत करार दिया।

वहीं विकास परिषद ने सौंपे गए ज्ञापन के कुछ मुख्य बिंदुओं में खण्ड विकास अधिकारी के महत्व और अधिकार को गिनाया है और  इसके लिए उन्होंने जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 92 का हवाला दिया। उन्होंने वित्तीय नियमों की अंतर्गत पैसों को विकास कार्यों के लिए दिये जाने के अधिकार को अपने अंतर्गत गिनाया है और इसके साथ ही साथ पंचायतराज पर विकास की रह से भटकाने और मौजूदा व्यवस्था को क्षति पहुँचाने का आरोप भी लगाया।

ग्राम पंचायत परिषद का कहना है कि सामुदायिक विकास के सशक्त पद खंड विकास अधिकारी के पद के नाम का फायदा उठा कर ग्राम्य विकास विभाग का मुखौटा लगाये खंड विकास अधिकारी पंचायतीराज व्यवथा एवं पंचायतीराज विभाग को नियंत्रणाधीन कर अपने अनुसार चलाना चाहते हैं। ग्राम्य विकास महापरिषद का कहना है कि पंचायत विभाग अपने संविधान की मूल भवन पंचायतीराज संस्थाओं को मजबूती प्रदान के बजाय अपने विभाग को कुत्सित प्रयास कर रहा है| हमारा उद्देश्य खंड विकास अधिकारी की भूमिका को मजबूती प्रदान करने का है न की उसे कमजोर करने का है।

रिपोर्टर - आशुतोष वर्मा/शेखर उपाध्याय

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