आशा बहू और एएनएम को मिलेगा सम्मान, बढ़ा हौसला

Swati ShuklaSwati Shukla   25 July 2016 5:30 AM GMT

आशा बहू और एएनएम को मिलेगा सम्मान, बढ़ा हौसलाgaonconnection

लखनऊ। पिछले छह वर्षों से शशिलता (29 वर्ष) गर्भवती महिलाओं, बच्चों को समय से टीकाकरण और नसबंदी के लिए जागरूक कर रही हैं। जागरुकता लाने के लिए उनको सम्मान के लिए चुना गया है, जिसके लिए वह काफी खुश हैं।

आशा और एएनएम मरीजों को बेहतर सुविधाएं दे सकें, इसके लिए एम-सेहत प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है। उसी के तहत अच्छा काम करने वाली आशा और एएनएम को सम्मानित किया जाता है, जिसके लिए आशा शशिलता को चुना गया है।

सीतापुर जिले के मिश्रिख ब्लॉक के राजनगर गाँव की रहने वाली शशिलता बताती हैं, “हमारे पास तीन गाँव की जिम्मेदारी है। सभी गर्भवती महिलाओं और बच्चों को समय पर टीकाकरण और नसबंदी कराने के लिए जागरूक करते हैं। इसलिए हमें सम्मान के लिए चुना गया। हम लोगों को अच्छा लगता है कि हमारे काम करने से लोगों को लाभ मिलता है।”  

स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आशा को एनआरएचएम योजना के तहत हुए सराहनीय कार्य करने के लिए आशा को सम्मानित किया जा रहा है। आठ वर्षों से आशा को ग्रामीण स्तर पर सफल बनाने के लिए भरपूर सहयोग किया है। मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाए जाने के लिए नियमित कार्य कर रही हैं।

सीतापुर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर महोबा ब्लॉक के अड़रोही गाँव की रहने वाली एएनएम शिप्रा श्रीवास्तव (33 वर्ष ) को भी अपने क्षेत्र में अच्छा काम करने के लिए सम्मान के लिए चुना गया है। शिप्रा बताती हैं, “जुलाई में भी हमको अच्छा काम करने के लिए सम्मानित किया गया है, हमने गर्भ के पूर्व गर्भवती महिलाओं कि जांच कराई और टीकाकरण किया इसलिए हमको सम्मान के लिए चुना गया।”

शिप्रा आगे बताती हैं, “हम सब बहुत मेहनत करते हैं हम लोगों का इनाम पाकर जो हौसला बढ़ता है इससे और ज्यादा काम करने की इच्छा होती है, उत्साह बढ़ता है। हमारे यहां 25 एएनएम हैं, जिसमें से तीन लोगों को सम्मान मिला है। इनको सम्मान मिलता देख और भी एएनएम अच्छा काम करेंगी।” बाराबंकी जिले के उमरी गाँव के रहने वाली शशि वर्मा (28 वर्ष )बताती हैं, “हमारे साथ काम करने वाली आशा को जब इनाम मिलता है तो हम लेाग भी सोचते हैं कि हमें भी अच्छा काम करना चाहिए। इतना ज्यादा काम दे दिया गया है, जिससे काम करना मुश्किल लगता है। गाँवों में सही बात बताने पर भी लोग आनकानी करते हैं। गर्भवती होने पर जांच कराने के लिए महिलाएं मना कर देती हैं। इसलिए हम बहुत सी समस्या होती हैं।”

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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