अब बाढ़, सूखा और बेमौसम बारिश से बेअसर रहेगा अनार

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मेरठ। उत्तर प्रदेश में बाढ़, सूखा और बेमौसम बारिश से परेशान होने वाले किसानों के लिए एक खुशखबरी है,अब वो अनार की ऐसी प्रजाति लगा सकते हैं जो हर मौसम के लिए अनुकूल होगी।   

मेरठ के कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने डेढ़ वर्ष के शोध के बाद अनार की नई प्रजाति का पौध तैयार करने का दावा किया है, जो प्रदेश के मौसम के अनुरूप होगी, जिसे किसान अपनी कृषि भूमि में आम की फसल के साथ लगाकर फायदा उठा सकते हैं। 

सरदार वल्ल्भ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के उद्यान विभाग के प्रोफ़ेसर डॉक्टर सत्यप्रकाश अपने अनार के शोध बारे में बताते हैं, “विश्वविद्यालय द्वारा अनार की मृदुला, गणेश, मस्कट रेड, अरकता, भगवा, जीवन 37, जालौन सीडलेस और फूले रक्ता ये 8 प्रजातियां पहले शोध के लिए लाई गईं थीं और इन पर शोध किया गया।” वो आगे बताते हैं, “इन पर शोध के बाद हमारे शोधार्थियों ने अब इस सब को मिला कर एक पौध तैयार की है जो प्रदेश के किसानों को दी जाएगी।”

इस पद्धति से की जाने वाली अनार की खेती से किसानों को काफी अच्छी आमदनी की उम्मीद है, क्योंकि जिस प्रकार पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश का मौसम चक्र बदल रहा है, उसमें ये फायदेमंद साबित होगी।ये नई अनार की खेती पर अन्य आम नाशपाती आदि के मुकाबले बदलते मौसम का असर कम पड़ेगा। 

ये सभी प्रजातियां पुणे, बीकानेर और पंत नगर के अनुसंधान केन्द्रों से लाई गई थी। शोधकर्ता डॉक्टर सत्यप्रकाश बताते हैं, “उन लोगों का उद्देश्य मात्र नई लाभकारी प्रजाति तैयार करना नहीं है वो प्रदेश के जलवायु के अनुसार अच्छी गुणवत्ता वाली अच्छी उपज देने वाली और मुख्यता कम और ज्यादा बारिश, गर्मी, सर्दी, सूखा, ओलावृष्टि आदि पर भी बर्बाद न होने वाली प्रजाति पैदा करना है।”

मेरठ के ही धौलड़ी निवासी आम के बाग़ मालिक शफीक एहमद ने बताया, “उत्तर प्रदेश के अधिकतर जिलों में आम के बाग है, आम के साथ वो लोग नाशपाती, आड़ू, कटहल, अमरुद की खेती भी करते हैं, लेकिन आम पर बारिश, ओला का नुकसान ज्यादा होता है और बीमारी और कीट भी जल्दी लगता है और नुकसान होता है। अब अनार की ऐसी प्रजाति मिल रही है तो वो उसे भी अपनी पारम्परिक फसलों के साथ उसकी भी खेती की जा सकेगी।

रिपोर्टर - सुनील तनेजा

 

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