अब खेल सकेंगे तमिलनाडु के युवा जल्लीकट्टू

अब खेल सकेंगे तमिलनाडु के युवा जल्लीकट्टूगाँव कनेक्शन, जल्लीकट्टू

नयी दिल्ली। केन्द्र सरकार ने तमिलनाडु के लोकप्रिय खेल जल्लीकट्टू (सांडों को काबू करना) को मंजूरी दे दी। केन्द्र के इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने वर्ष 2011 में जल्लीकट्टू  पर रोक लगा दी थी और इसके बाद मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी केन्द्र की इस रोक पर अपनी सहमति जताई। 

तमिलनाडु में जल्लीकट्टू, महाराष्ट्र में बैलगाड़ी दौड़, कर्नाटक में कंबाला और पंजाब में बैलों के साथ दौड़ का परंपरागत सांस्कृतिक चलन है।   

पोंगल त्योहार की खुशी में जल्लीकट्टू का आयोजन किया जाता है। जल्लीकट्टू सदियों पुराना त्योहार है। पोंगल के त्यौहार के हिस्से के तौर पर मट्टू पोंगल के दिन जल्लीकट्टू का आयोजन किया जाता है। इसमें युवक सांड को नाथते हैं। खेल में मजा आए इसके लिए लोग सांड को शराब पिला देते हैं उनकी आंखों व संवेदनशील अंगों में मिर्च लगा देते हैं। जिससे खेल में मजा आए।

केंद्र ने सांडों को काबू में करने के खेल जल्लीकट्टू को मंजूरी देने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। पर केन्द्र ने इसकी मंजूरी देने के साथ कुछ शर्तें लगा दी है। जिसमें जल्लीकट्टू मामले में सांड को 15 मीटर की अर्धव्यास दूरी के भीतर काबू करना होगा। साथ ही यह ध्यान रखना होगा कि सांड स्वस्थ रहे। 

महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में बैलगाड़ी की दौड़ जैसे कार्यक्रमों में सांडों को प्रदर्श पशु (परफॉर्मिग एनिमल)के तौर पर प्रदर्शित या प्रशिक्षित करना जारी रखा जा सकता है। इसमें बैलगाड़ी की दौड़ एक नियमित ट्रैक पर आयोजित करनी होगी जो दो किलोमीटर से लम्बा नहीं होगा।

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