अब किसान पा सकेंगे सही उर्वरक व दवाएं

अब किसान पा सकेंगे सही उर्वरक व दवाएं

बाराबंकी। अब उर्वरक बेचने का लाइसेंस उन्हीं को मिलेगा जिसके पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कृषि या रसायन विज्ञान में स्नातक या कृषि संबंधी डिप्लोमा होगा। नई व्यवस्था शीघ्र ही शुरू हो जाएगी। 

केंद्र सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय से जारी शासनादेश में बताया गया है, अब किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से कृषि विज्ञान स्नातक, रसायन विज्ञान स्नातक या कृषि में डिप्लोमाधारी को छोड़कर किसी अन्य को खाद बिक्री का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान और अन्य सरकार से अनुमोदित संस्थानों से न्यूनतम छह माह की अवधि का कृषि इनपुट में प्रमाण पत्र होना अनिवार्य कर दिया गया है। कृषि विभाग ने लाइसेंस के आवंटन में नवीन व्यवस्था लागू कर दी है।

नए नियमों से खाद की गुणवत्ता व अभिलेखों को दुरुस्त रखने की प्रक्रिया में फायदा होने की संभावना जताई जा रही है। लाइसेंसधारक को बिक्री के अभिलेखों को दुरुस्त करना पड़ता है लेकिन जिले में ऐसे तमाम लाइसेंसधारक हैं जो अनपढ़ हैं।

इससे बहुत सी कठिनाई आती है। अब यदि पढ़-लिखे लोगों को लाइसेंस जारी होगा तो अभिलेख भी दुरुस्त रहेंगे। वहीं किसानों को खाद की गुणवत्ता समझाने व अन्य खेती-पाती की जानकारी देने में सहूलियत रहेगी।

जिला कृषि अधिकारी डॉ एसपी सिंह ने बताया, ''नए शासनादेश जारी होने से पूर्व जिन आवेदकों को खाद बिक्री अधिकार पत्र जारी हो चुके हैं, उन पर यह आदेश नहीं लागू होगा। हालांकि समय पर उन्हें नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। देरी, पुराने लाइसेंसधारियों पर भारी पड़ सकती है। यह शासनादेश कृषि सहकारी संस्थाओं और राज्य विपणन परिसंघों पर लागू नहीं होगा। अब कृषि या विज्ञान रसायन वर्ग की पात्रता रखने वाले लोगों को ही लाइसेंस दिया जाएगा।"

वे आगे बताते हैं, ''जिले में साढ़े चार लाख किसान हैं, आबादी के सापेक्ष जिले में साधन सहकारी समिति की 124 दुकानें, निजी सेक्टर की 600 के आस-पास उर्वरक दुकानें संचालित हैं। इसके अलावा पीसीएफ की दो, एग्रो व इफ्को की तीन-तीन और होफेड की 15 दुकानें स्थापित हैं। खाद की बिक्री का अधिकार पत्र जिला कृषि अधिकारी जारी करता है। अभी तक विभाग से अनपढ़ों को भी खाद बिक्री का लाइसेंस मिल जाता था।"

पिछले कई वर्षों से खाद की दुकान चला रहे सुशील सिंह (34 वर्ष) बताते है, ''सरकार का फैसला अच्छा है, अब डिग्री वाले ही उर्वरक बेच सकेंगे तथा उन दुकानों पर लगाम लगेगी जिनके पास अनुभव नहीं है। किसान भाइयों को सही जानकारी नहीं मिल सकने की वजह से खेती को बहुत नुकसान हो रहा है। इस नियम के आने से किसानों को सही जानकारी व सही मात्रा में खाद       मिल पाएंगी।"

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