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अब महिलाओं को मिलेगा मालिकाना हक

अब महिलाओं को मिलेगा मालिकाना हक

लखनऊ। अब महिलाओं को ज़मीन में बराबर का हक मिलेगा। अविवाहित पुत्री को पुत्र और विधवा के समान ही प्राथमिक तौर पर उत्तराधिकारी माना जाएगा। यही नहीं, अगर किसी व्यक्ति को कोई भूमि आवंटित की जाती है तो उसकी पत्नी भी बराबर की हिस्सेदार होगी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 को लागू कर ग्रामीण न्यायिक व्यवस्था में सुधार लाने का एक बड़ा क दम उठाया है। जहां एकतरफ इस नई राजस्व संहिता की मदद से लोगों को जल्द न्याय मिल सकेगा, वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम में सरकार ग्रामीण तहसीलों में गाँवों की जीआईएस मैपिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मुहैया करने जा रही है। 

''संहिता के लागू होने से पुराने जटिल राजस्व कानून समाप्त हो जाएंगे और जनता को जल्द न्याय मिल सकेगा।’’ उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (संशोधन) का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, ''यह प्रदेश सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला है। हमारा सौभाग्य है कि हम इसे पूरा करके जनता के बीच में पेश कर पा रहे हैं। इससे न्याय सस्ता होगा और उन्हें कचहरी के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।’’ यह संहिता प्रदेश में 11 फ रवरी, 2016 से लागू होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, ''गाँवों में ज्य़ादातर विवाद कुछ सीमित चीजों को लेकर होते हैं। गाँवों की जीआईएस मैपिंग से इन मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।’’

वहीं, राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा, ''इस संहिता के माध्यम से सरकार लोगों को जल्द न्याय दिलवाने में मदद करेगी। इसकी ई-बुक राजस्व परिषद की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है।’’

तहसीलों में हो आधुनिक तकनीक

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, ''नई तहसीलें मौजूदा समय की जरूरतों के हिसाब से बनाई जानी चाहिए। तहसीलों में आधुनिक तकनीकी सुविधाएं होनी चाहिए। जिससे जनता को जानकारियां एक क्लिक पर प्राप्त हो सकें।’’ साथ ही सीएम ने अमरोहा जनपद के नौगवां सादात को नई तहसील बनाने की घोषणा की। 

नई राजस्व संहिता में क्या होगा खास ---

  1. चकबंदी और आपसी बंटवारे के लिए अब तहसील स्तरीय कोर्ट के ज्यादा चक्कर नहीं लगाने होंगे।
  2. लंबे समय तक अंतिम आदेश जारी होने का इंतजार नहीं करना होगा।
  3. निजी भूमि की पैमाइश कराना भी आसान हो जाएगी।
  4. कोई भी ज़मीनी मालिक एक हजार रुपए जमा कर अपनी भूमि की पैमाइश करा सकेगा।
  5. राजस्व विभाग की 234 धाराओं और 16 अध्यायों में संशोधन कर राजस्व से संबंधित नियमों की दिक्कतों को आसान किया है।
  6. नई राजस्व संहिता में अब राजस्व कोर्ट में दायर होने वाले नए केसों की सुनवाई की जाएगी।
  7. संशोधित राजस्व संहिता लागू होने के बाद कोई भी अशक्त व्यक्ति अपनी कृषि भूमि का दूसरे के नाम पट्टा नहीं कर सकता है।
  8. सुरक्षा चिन्हों की रखवाली और उनकी हिफाजत करना भूमि स्वामी की ही जिम्मेदारी होगी।

दलित समुदाय को मिली राहत

नई राजस्व नियम के तहत दलित किसी को भी अपनी जमीन तीन शर्तों पर बेच सकेंगे। इसके लिए तीन शर्तें सरकार ने लागू की है।

  1. पहली शर्त में जमीन बेचने वाला दूसरी जगह बसने जा रहा हो।
  2. दूसरी शर्त में ज़मीन देने वाला व्यक्ति किसी जानलेवा रोग से पीड़ित हो।
  3. तीसरी शर्त में यह रखा गया है कि व्यक्ति का कोई उसका उत्तराधिकारी न हो।

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